80 की राह चला गोरखपुर, योगी के घर में ही बेखौफ़ हुए गुंडे

गोरखपुर: अपराध के मामले में शिकागो की संज्ञा पाने वाले गोरखपुर में इन दिनों अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। अपराध की घटनाओं में वृद्धि से पुलिस की परेशानी पर भी बल ला दिया है। पुलिस मुख्यमंत्री की नजरों में खुद को बेहतर साबित करने के लिए एक तरफ किसी मामले का खुलासा कर रही तो दूसरी ओर अपराधी भी दूसरा अपराध कर उनकी खुशी को काफूर कर दे रहे।

यह संयोग है या पुलिसिया इक़बाल को चुनौती कि अपराधियों ने एक ट्रेंड बना लिया है। जब गोरखपुर में मुख्यमंत्री का आना होता है तो उसके पहले या बाद में कोई न कोई बड़ी वारदात हो जा रही।

बहरहाल, पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक शेर जरूर मौजूं है, “अगर आपका दावा है कि रातें हो गई हैं रुखसत, तो मुझे पूछने दीजिये सवेरा क्यूँ नहीं होता।” बता दें कि प्रदेश के पुलिस विभाग में जितने ट्रांसफर नहीं हुए होंगे उतने ट्रांसफर-पोस्टिंग विभिन्न स्तरों पर गोरखपुर ज़िले में पिछले तीन माह में किये जा चुके हैं, लेकिन अपराध है कि थमने का नाम नहीं ले रहा।

– 11 अप्रैल को तेल व्यवसायी चंद्रप्रकाश टिबड़ेवाल की शहर के साहबगंज मंडी से घर जाते हुए दीवान बाज़ार में सरेआम गोली मार दी जाती है। पहले बीस लाख रुपये की लूट की बात कही गई। यह रकम बाद में पुलिस के अनुसार करीब 8 लाख हो जाती है।

मुख्यमंत्री के संज्ञान लेने पर पुलिस इसे वारदात को 48 घंटे में खुलासा का आश्वासन व दावा करती है। करीब एक पखवारे में आधा-अधूरा खुलासा कर अपना पीठ भी थपथपा लेती । लेकिन आज तक वारदात में शामिल अधिकतर अपराधी पकड़ से बाहर हैं और लूट की रकम ( जितनी पुलिस बता रही) का अधिकतर हिस्सा बरामद नहीं हो सका।

– मुख्यमंत्री के गोरखनाथ मंदिर द्वारा संचालित गुरु गोरक्षनाथ अस्पताल में मुंबई की एक फर्म ने जालसाजी कर डेढ़ लाख का चूना लगा दिया। हाईप्रोफाइल मामले को लेकर पुलिस परेशान है।

– 14 मार्च को एक सिक्योरिटी एजेंसी से रिलायंस पेट्रोल पंप के पास से 99 लाख रुपये लूट लिए गए। गोरखपुर की इस सबसे बड़ी लूट का खुलासा करने में पुलिस कामयाब होने का दावा तो कर रही, लेकिन आज भी लूट की रकम की बरामदगी उसके दावे पर सवाल उठाते हैं।

पुलिस के अनुसार कैश वैन के कर्मचारियों ने ही लूट की योजना कुछ बदमाशों संग मिलकर बनाई थी। आरोपी कर्मचारी गिरफ्तार हो गए। लेकिन अपराधी आज भी पकड़ से बाहर हैं। पुलिस ने कर्मचारियों को जेल भेज खुलासे का दावा किया लेकिन आज भी 68 लाख रुपये की बरामदगी नहीं हो सकी है।

– 15 जून की देर रात में दवा व्यवसायी नीरज रामनायका को कमिश्नर आवास के पास गोलियों से भून दिया गया। फायरिंग करते हुए बदमाश पैदल ही वारदात स्थल से निकल गए लेकिन वह भी पकड़ से दूर हैं।

(संदीप त्रिपाठी)

GFR Desk


80 की राह चला गोरखपुर, योगी के घर में ही बेखौफ़ हुए गुंडे

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