January 21, 2018
संतकबीर नगर

संतकबीर नगर: इस गाँव में आज भी रास्ता ना होने के नाते फसल कटने के बाद ही बजती है शादी की शहनाई

संतकबीर नगर: लग्न के मौसम में आजकल जहां हर तरफ शादियों में शहनाइयां बज रही हैं। तो वहीं पड़ोसी जनपद संतकबीरनगर में एक ऐसा भी गांव है जहां शादी के लग्न की नही, बल्कि हर साल फसल कटने का इंतज़ार होता है। और तब जाकर बजती हैं उस गांव में शादी की शहनाइयां।

संतकबीरनगर जिले के बखिरा क्षेत्र में आने वाले बड़गों गांव के दो ऐसे दलित पूर्वे हैं ।जिनकी आबादी लगभग एक हजार से ज़्यादा की है। जहां शादियों की लगन का नहीं बल्कि खेतों में फसल कटने का इंतजार होता है। उसके बाद ही कहीं जाकर उस गांव में किसी के घर शादी होती है।

दरअसल बड़गों गांव के दो दलित पुरवों में जाने के लिए एक पतली मेड़ के सिवा कोई भी और दूसरा रास्ता नहीं है। और जब शादियों की लग्न का मौसम होता है तो उस वक्त खेत में फसलों की बुआई हो जाती है । और ऐसे में किसी के खेत से कोई भी किसी को गुजरने नहीं देता है।

गर्मी के दिनों में फसल कटती है और जब खेत खाली होता है । उसके बाद ही इस गांव में शादियां होती है । क्योंकि खेत के रास्तों से ही बराती और उनकी गाड़ियां गांव में जाने के लिए गुजरती है।

आजादी के बाद से अब तक बहुत सी सरकारें आई। सभी ने कई सारे वादे किए लेकिन बड़गों गांव में जिस तरह रास्ता ना होने को लेकर लग्न में वहां शादियां नहीं होती। और उन्हें फसल कटने का इंतजार रहता है इसको देखकर यही लगता है की तमाम सरकारों के द्वारा किए गए विकास के दावे महज कोरा कागज़ ही हैं।

इतना ही नहीं रास्ता ना होने को लेकर इस गांव में कई ऐसे लड़के हैं जिनकी शादी तक कट चुकी है और वह कुंवारे ही बैठे हुए हैं। इनमें एक बूढ़ी मां मेवाती देवी को इस बात का मलाल है कि। उसके घर तक आने के लिए कोई रास्ता ना होने को लेकर उसके बेटे की तीन बार शादियां कट चुकी है। उसकी उम्र बढ़ते-बढ़ते 30 बरस की हो चुकी है।

उसकी बूढ़ी मां को आज भी इंतजार है कि उसके बेटे की शादी हो और दुल्हन के साथ बारात लेकर उसका बेटा घर आए। वही जब रास्ते को लेकर ग्राम प्रधान से बात की गई तो ग्राम प्रधान ने भी यह माना कि रास्ता ना होने को लेकर शादियों में दिक्कतें आती है और लोग फसल कटने तक का इंतज़ार करते हैं।

चकबंदी ना होने की वजह से सड़क के लिए कोई भी रास्ता नहीं है इसके लिए प्रशासन से गुहार लगाई गई है। सड़क के लिए जमीन कब मिलेगी ये नही मालूम।

Related Posts

संतकबीर नगर: इस गाँव में आज भी रास्ता ना होने के नाते फसल कटने के बाद ही बजती है शादी की शहनाई