April 18, 2018
संतकबीर नगर

VIDEO: मेहदावल में अभी भी चल रही है जमींदारी प्रथा, लोग जी रहे हैं गुलामों की जिंदगी

मेहदावल में अभी भी चल रही है जमींदारी प्रथा

संतकबीरनगर: देश को आजाद हुए 70 साल का एक लंबा आरसा गुजर चुका है लेकिन अंग्रेजों के जाने के बाद आजाद भारत में आज भी कुछ लोग गुलामों जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं। संतकबीरनगर जिले की मेहदावल तहसील के नगर पंचायत मेहदावल में आज भी लोग जमीदारी प्रथा जैसी गुलामी की जंजीरों में जकड़े हुए हैं लेकिन आज तक जितनी भी सरकारें आई किसी एक ने भी जमीदारी प्रथा को तोड़ने की ज़हमत नहीं उठाई।

आलम यह है कि यहां के गरीब तपके के लोग ज़मीदारी और ज़मीदारों की दहशत के साए में जीने को मजबूर हैं। देश से भले ही अंग्रेज चले गए हो लेकिन इस देश में आज भी कुछ ऐसे तबके हैं जो गुलामों जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

नगर पंचायत मेहदावल में आज जमींदारी प्रथा लागू है और यहां के जमींदार अंग्रेजों के जमाने से यहां के लोगों से जमीदारी वसूलते आ रहे हैं। यहां के जमींदार दुकानदारों से जहां 2 रुपये से लेकर 5 रुपये तक की वसूली करते हैं तो वही इस नगर पंचायत में अगर कोई मकान बनाने के लिए एक ईंट भी रखता है तो जमींदारों के द्वारा मकान मालिक से बकायदा वसूली की जाती है।

उसके बाद ही कहीं जाकर वह अपना मकान बनाने के लिए दीवार खड़ी कर सकता है और जो जमीदारी नहीं देता उसको मकान बनाने के लिए इजाजत नहीं देते।

इतना ही नहीं गौशाला इलाके के दलित पूर्वा में तो जमीदारों का खौफ इस कदर है कि यहां मकान बनाना तो दूर लोग शौचालय भी नहीं बना पाते।एक पीड़ित महिला आरती देवी ने अपना दर्द बयां करते हुए अपनी पीड़ा सुनाई की सरकार से उसे शौचालय बनाने के लिए पहली किस्त के चार हज़ार रुुपये मिले थे और जब उसने शौचालय बनाने के लिए गड्ढा खोदा और ईट मंगानी शुरू की वैसे ही यहां के स्थानीय जमीदार आ धमके और उन्होंने शौचालय बनाने के पहले जमींदारी मांगनी शुरू कर दी।

जब आरती देवी ने जमीदारी देने से मना कर दिया तो जमीदारों ने शौचालय ना बनाने की धमकी दी और आज तक आरती देवी का शौचालय नहीं बन सका जबकि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छ भारत अभियान के तहत पूरे भारत को खुले में शौच मुक्त करना चाहते हैं लेकिन मेहदावल के इस इलाके में जमींदारों की दहशत इतनी है कि यहां पर मकान बनाना तो दूर अगर जमीदारी नहीं दी तो कोई झोपड़ी में एक शौचालय भी नहीं बना सकता।

वहीँ एक स्थानीय जमीदार तारेस सिंह से जब जमीदारी प्रथा के बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि जमीदारी प्रथा वर्षों से चली आ रही है और जो हम इसकी वसूली करते हैं। वह प्रशासन के मुनीम को हिसाब देकर जमा करते हैं और हम भी यह चाहते हैं कोई एक ऐसी सरकार आए जो इस जमींदारी प्रथा को खत्म कर दें हमें इसका मुआवजा दे और यहां की जमीनों को सरकार अपने हाथ में ले लेकिन आज तक किसी भी सरकार ने जमीदारी उन्मूलन पर पहल नहीं की।

इस सम्बन्ध में मेहदावल के बीजेपी विधायक राकेश सिंह बघेल से जब बात की गई तो मालूम यह पड़ा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश शासन को जमीदारी प्रथा खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा है।

विधायक की माने तो मेहदावल में जमीदारी प्रथा खत्म ना होने से यहां का विकास पूरी तरह ठप है और अगर यहां की जमींदारी प्रथा खत्म हो जाए तो मेहदावल का भी विकास होगा क्योंकि मेहदावल में जमीदारी प्रथा एक कोढ़ बनकर रह गई है और देश को आज़ाद हुए भले ही 70 साल गुजर गया हो लेकिन मेहदावल नगर पंचायत ले लोग आज भी भारत देश मे गुलाम हैं।

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