April 18, 2018
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हॉलमार्किंग में गोरखधंधा, सीएम सिटी में छापों ने दिखाया हर चमकती चीज सोना नहीं होती

गोरखपुर गहनों  में हॉलमार्किंग  गोरखधंधा मामला गर्म

राकेश मिश्रा
गोरखपुर: आजकल हॉलमार्क गहनों को लेकर गोरखपुर में मामला काफी गर्म है। एक तरफ पुलिस छापा मार कर नकली गहने बनाने वाले ज्वेलर्स को उजागर करने का दावा कर रही है तो वहीँ दूसरी तरफ जिनके यहाँ छापा पड़ा उन्होंने एक सुर में पुलिस पर ही उनको इरादतन परेशान करने का आरोप लगाया है।

मामला कुछ भी हो एक बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि यह धंधा उतना तो चमकदार नहीं ही है जितना बाहर से दिखता है या यह कह सकते हैं कि हर चमकदार चीज सोना तो होती है। सोने की बढ़ती कीमतों की वजह से इन गहनों की खरीदारी करना अब आम आदमी के लिए सपना जैसा होता जा रहा है। वहीँ दूसरी तरफ भारतीय समाज में सोने के प्रति अगाध प्रेम को नाकारा भी नहीं जा सकता है।

लोगों का सोने के प्रति इसी प्रेम को इस धंधे में जुटे लोग एक केन प्रकारेण फ़ायदा उठाते हैं। यह बताने की जरुरत नहीं है कि हर धंधे की तरह इस धंधे में भी अच्छे और बुरे दोनों तरह के व्यवसायी हैं। आपको बता दें कि जूलरी बाजार में अवैध हॉलमार्किंग का धंधा भी जोरों पर है। लो कैरेट सोने पर हायर फिटनेस नंबर डलवाने या ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (बीआईएस) के लाइसेंस के बिना ही अपनी जूलरी पर हॉलमार्किंग करवाने वालों की कमी नहीं है।

इस सम्बन्ध में पूर्वांचल के प्रतिष्ठित ज्वेलर और सोने, चांदी और हीरे के होलसेल डीलर राम निवास सराफ प्राइवेट लिमिटेड के मालिक विकास सराफ का कहना था कि धोखाधड़ी से बचने के लिए ग्राहकों को हॉलमार्क रजिस्टर्ड फर्म से ही गहनों की खरीदारी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्राहकों को खरीदारी का पक्का बिल भी लेना चाहिए क्योंकि कई बार गहनों के गायब होने की स्थिति में साबुत के तौर पर रसीद को दिखाया जा सकता है। लाकर आदि में भी गहने पक्की रसीद के रहने पर ज्याद सुरक्षित रहेंगे।

आपको बता दें कि बीआईएस रजिस्टर्ड सेंटर से कराई गई हॉलमार्किंग के तहत गहनों के हर पीस पर 5 तरह के मार्क छापे जाते हैं। पहला बीआईएस का लोगो, दूसरा फिटनेस नंबर यानी कैरेट का संकेत, तीसरा मार्किंग सेंटर का लोगो, चौथा वर्ष कोड और पांचवां बेचने वाले जूलर का लोगो या ट्रेड मार्क।

अब आइये जानते हैं कैसे होता है फर्जीवाड़ा

गहनों के मामले में दो तरह का फर्जीवाड़ा होता है। एक, हॉलमार्किंग तो असली होती है, लेकिन रजिस्टर्ड जूलर मार्किंग सेंटर वालों को पैसे खिलाकर लो कैरेट सोने पर एक दो नंबर ज्यादा कैरेट का निशान छपवा लेते हैं। दूसरा, बीआईएस रजिस्ट्रेशन के बिना ही आधा-अधूरा हॉलमार्किंग करा ली जाती है, जिसमें अनिवार्य 5 चिह्नों की जगह 3 या 4 चिह्न ही रखे जाते हैं। यह सिर्फ ग्राहक को इम्प्रेस करने के मकसद से होता है, उसे कोई सर्टिफिकेट नहीं दिया जाता।’

हॉलमार्किंग फिटनेस नंबर हर कैरेट के लिए अलग-अलग होता है। आपको बता दें कि कैरेट में एकाध नंबरों का फर्क तब तक नहीं पकड़ा जा सकता, जब तक ग्राहक उसकी किसी लैब में जांच नहीं कराए। आम तौर पर लोग हॉलमार्किंग और सर्टिफिकेट से ही संतुष्ट होते हैं, लेकिन अंतर ज्यादा होने से बायबैक स्कीमों और पुरानी जूलरी को बेचते समय यह विवाद बन सकता है। लेकिन फर्जीवाड़े का बड़ा धंधा बिना रजिस्ट्रेशन के ही 3 या 4 मार्क लगवाकर ग्राहकों को गुमराह करने वालों का है।

बीआईएस कानून के मुताबिक हॉलमार्किंग या जूलरी की किसी भी शिकायत पर जिम्मेदारी हॉलमार्किंग सेंटर की नहीं, बल्कि जूलर की होगी और उसी के खिलाफ मामला दर्ज होगा। ऐसे में लोग रजिस्ट्रेशन लेने से बचते हैं।

बीते वर्ष भारतीय मानक ब्यूरो ने भारतीय मानक ब्यूरो ने सोने की हॉलमार्किंग से जुड़े मानक में बदलाव किया। सोने के आभूषण तीन ग्रेड-14,18 और 22 कैरेट में ही उपलब्ध करवाने के आदेश दिए। इससे पहले तक हॉलमार्किंग वाले स्वर्ण आभूषण 10 अलग-अलग ग्रेड में बेचे जा रहे थे। इतने प्रकार की शुद्धता वाले आभूषण को लेकर उपभोक्ता भ्रमित होता था।

ज्वैलरी पर इस तरह रहेगी मुहर

मानक ब्यूरो के अनुसार 22 कैरेट अर्थात एक ग्राम सोने में 916 मिलीग्राम शुद्धता, 18 कैरेट यानि 750 मिलीग्राम शुद्धता एवं 14 कैरेट से आशय है 1000 मिलीग्राम सोने में 585 मिलीग्राम शुद्धता। आभूषण जितने कैरेट सोने का होगा उस पर उतने अंक के साथ अंगरेजी का ‘के’ अक्षर की मुहर रहेगी। मसलन 22 कैरेट के लिए ’22 के916′ की सील एवं ज्वैलर की पहचान मुहर भी रहेगी।

भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने केवल हॉलमार्क वाले आभूषणों की बिक्री को अनिवार्य बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए नियमों का एक मसौदा जारी किया था। इसमें हॉलमार्क आभूषण बेचने वाले जौहरियों का बीआईएस के साथ पंजीकरण अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव है। सूत्रों के मुताबिक एक बार जौहरियों के बीआईएस के साथ पंजीकरण कराने के बाद केवल हॉलमार्क वाले गहनों की ही बिक्री हो सकेगी। हालांकि इससे गहनों की ऑनलाइन बिक्री बंद हो जाएगी क्योंकि बीआईएस पंजीकरण केवल दुकानों को दिया जाता है।

एक जानकारी के अनुसार फिलहाल लगभग 25,000 जौहरियों के पास गहने बेचने के लिए बीआईएस का लाइसेंस है। अगर बीआईएस हॉलमार्किंग नियमों के मसौदे को लागू किया गया तो 300,000 से अधिक जौहरियों और दुकानों को व्यक्तिगत रूप से व्यक्तिगत रूप से पंजीकरण कराना होगा और सालाना शुल्क चुकानी होगी। इससे पहले बीआईएस ने हॉलमार्किंग केंद्रों से केवल कुछ श्रेणियों के गहनों पर ही मुहर लगाने को कहा था।

हॉलमार्क गहनों की खरीदारी और उससे सम्बंधित किसी भी जानकारी के लिए उपभोक्ता विकास सराफ से उनके मोबाइल 7080304453 पर बात कर सकते हैं।

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