April 18, 2018
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पैडलेगंज: सीएम सिटी में मौत से पहले हो रही पैडलेगंज में कब्र की बुकिंग

मौत से पहले हो रही पैडलेगंज में कब्र की बुकिंग

गोरखपुर: सीएम सिटी गोरखपुर में ईसाई समाज में मौत के बाद भी पति-पत्नी के साथ-साथ रहने की ख्वाहिश ने एक नए चलन को जन्म दे दिया है। इसे पूरा करने के लिए एक ही कब्र में पति-पत्नी दोनों को दफनाया जाए। पैडलेगंज कब्रिस्तानों में पति या पत्नी जमीन की एडवांस बुकिंग कर रहे है जिस कब्र में पति या पत्नी (जिसकी मौत पहले हो) दफ्न हो, उसी में पार्टनर की डेथ के बाद सुलाने के लिए बुकिंग हो रही है ताकि साथ रहने का सिलसिला सांसो थमने के बाद भी कायम रहे।

गोरखपुर के पैडलेगंज में अभी तक 5 दंपति इस तरह से एक दूजे के साथ दफनाए जा चुके हैं। हाल में एक और महिला ने पति की कब्र में अपने लिए जगह बुक कराई है। यह कब्रिस्तान करीब 300 साल पुराना है, जिसमें 150 से ज्यादा कब्रें अंग्रेजों की हैं। साथ में दफनाए जाने के लिए कब्रिस्तान में एडवांस बुकिंग का चलन पिछले कुछ वर्षों में बढ़ा है।

असुरन क्षेत्र निवासी एंथोनी साइमन की मृत्यु 27 सितम्बर 2012 में हो गई थी। उनकी पत्नी ने अभी से व्यवस्था कर ली है कि मरने के बाद उन्हें भी पति की कब्र में ही दफन किया जा सके।वही कब्र बुक कराने वाले सुनील हर्शल मैथ्यू ने बताया कि मैं अपनी पत्नी की कब्र के बगल में अपने लिए जगह बुक कराई है। जब मेरी डेथ हो तो मुझे पत्नी की कब्र के बगल में ही दफनाया जाए।ऐसा मानना है कि सारी जिंदगी साथ रहने के बाद जब वह पल आएगा कि शरीर में सांसे नहीं बचेंगी। उस पल भी हम दोनों साथ रहेंगे ।मेरी मां की डेथ के बाद मेरे पिता ने भी कब्र की जगह बुक कराई थी और उनके मरने के बाद उन्हें उसी कब्र में दफनाया गया। मैंनें 10 हजार रुपए में पत्नी की कब्र के बगल में अपने लिए जगह बुक कराई है।”

सेंट जोसेफ सिविल लाइन की प्रिंसिपल, सिस्टर मरियम ग्योरो ने बताया हमारे धर्म में ऐसा बोला भी गया है कि पति पत्नी के साथ एक अटूट रिश्ता रहता है, जिसे वह मरते दम तक निभाते हैं।मरने के बाद भी इस पवित्र रिश्ते को निभाने की यह एक अच्छी पहल है मरने के बाद यह कोई नहीं जानता कि अगले जन्म में कहां जाता है। मन की संतुष्टि के कारण हम मरने के बाद अपने जीवनसाथी के साथ ही रहना चाहते हैं।”

जानकारों की माने तो ”ये कहीं ना कहीं कब्रिस्तानों की संख्या कम होने से इस प्रथा को निभाना एक मजबूरी भी है। मरने के बाद इंसान को कब्रिस्तान में दफनाया जाता है। उस भूमि का दायरा 6/3 का होता है।’25 साल बाद फिर से किसी दूसरे मुर्दे को वहां दफनाया जा सकता है लेकिन इस परंपरा के अनुसार लोग जीते जी अपने जीवन साथी के साथ, उनकी कब्र के बगल में कुछ पैसे देकर उस भूमि को आवंटित करा लेते हैं। ताकि जब उनकी मृत्यु हो जाए तो उन्हें अपने जीवनसाथी के बगल में ही दफना दिया जाए।”

कब्रिस्तान के केयरटेकर राहुल प्रजापति ने बताया कि मेरे पूर्वज पिछले 3 पुश्तों से कब्रिस्तान की देखभाल कर रहें हैं। यहां पर कुछ लोग जीते जी अपने लिए कब्रों की एडवांस बुकिंग करवा रहे हैं।”

इस प्रथा को निभाने का एक सबसे बड़ा कारण यह भी है कि लगातार जगह सीमित होती जा रही है। लोगों को मरने के बाद 4 गज जमीन नसीब हो इसलिए वह पहले से ही एडवांस बुकिंग कराकर अपने लिए कब्र सुरक्ष‍ित कर रहे हैं।”

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