April 18, 2018
बस्ती

बस्ती: 14 लोगों की जान बचाने वाले भीमसेन की बहादुरी का परिणाम केवल आश्वासन, उपेक्षा

बस्ती 14 लोगों की जान बचाने परिणाम केवल आश्वासन

बस्ती: जनपद के बहादुर बेटे भीमसेन की बेबसी पर प्रशासन की लापरवाही वाकई शर्मिंदगी का एहसास कराती है। महज 12 साल की उम्र में भीमसेन ने घाघरा नदी में नाव पलटने पर 14 लोगों की जान बचाई। उस समय सोनू सातवीं क्लास का विद्यार्थी था। सोनू को अपनी इस वीरता के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया था।

सम्मान पाने के बाद जिले के प्रभारी, डीएम और प्रमुख सचिव रेणुका कुमार ने गाँव का दौरा किया था। जरूरी सुविधाएं दिलाने का आश्वासन दिया था। लेकिन जिला प्रशासन की लापरवाही से आज भी बस्ती में बहादुर बेटे का परिवार खानाबदोशों की जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

जनपद के कलवारी थाना क्षेत्र के डकही गांव के भीमसेन उर्फ सोनू ने अपनी बहादुरी के दम पर जनपद का नाम रोशन किया था। भीमसेन को उसकी बहादुरी के लिए 26 जनवरी 2015 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया था।

अपनी जान पर खेल कर भीमसेन ने नवम्बर 2014 में घाघरा नदी में नांव पलटने पर 14 लोगों की जान बचाई थी। भीमसेन की उम्र महज 12 साल थी, जिसके लिए उसे राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। लेकिन आज उस बहादुर छात्र भीमसेन की उपेक्षा हो रही है। भीमसेन का परिवार आज भी गरीबी की वजह से छप्पर के मकान में रहने को मजबूर है, पात्र होने के बावजूद भी उसे सरकारी आवास तक नहीं दिया गया।

आवास और अन्य सुविधाओं के लिए बहादुर भीमसेन पिछले दो सालों से अधिकारियों का चक्कर लगा रहा है,लेकिन कोई सुविधा आज तक नहीं मिली। अधिकारियों का चक्कर लगाते लगाते अब बहादुर भीमसेन का दिल भी टूट चुका है। भीमसेन गरीबी की वजह से ठीक से पढाई तक नहीं कर पा रहा है। परिवार वाले मेहनत मजदूरी कर किसी तरह भीमसेन की पढ़ाई लिखाई करवा रहे हैं। भीमसेन के छप्पर के मकान में गैस चूल्हा न होने की वजह से चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हैं।

भीमसेन के परिजनों का कहना है कि जब उनके लड़के को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया तो बहुत से अधिकारी गांव में आए और घर, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए आश्वासन भी दिया, लेकिन आज तक कोई सरकारी लाभ नहीं मिला। वहीँ भीमसेन का कहना है की राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार का उसे कोई लाभ नहीं मिल रहा है।

भीमसेन के गांव में आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। ज्यादातर लोगों के घर छप्पर के बने हुए हैं। आजादी के बाद से आज तक बिजली की सप्लाई गांव में नहीं पहुंची है। शुद्ध जल के लिए सरकारी हैण्ड पम्प तक लोगों को मुहैया नहीं है, लोग दूषित जल पीने को मजबूर हैं। लोगों को ठीक से सरकारी राशन नहीं मिलता। गांव वालों का आरोप है की कोटेदार एक महीने राशन देता है और एक महीने का राशन ब्लैक कर लेता है। गांव में लोगों के पास शौचालय तक नही है, लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।

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