April 18, 2018
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8 बच्चों की जान बचाने वाले को नहीं मिली कोई सुविधा, मिले तो बस आश्वासन

गोरखपुर 8 बच्चों की जान बचाने वाले को नहीं मिली कोई सुविधा

गोरखपुर: सरकार के दावे किस तरह जमीन तक आते-आते दम तोड़ देते है, इसकी एक बानगी देखने को मिल रहा है गोरखपुर के ओम प्रकाश के मामले में। ओम प्रकाश उस शख्स का नाम है, जिसने छोटी सी उम्र बड़ा काम कर दिया था। खेलने कूदने वाले उम्र में 8 जिंदगियों को बचा कर जिंदगी भर की सजा अपने गले फांस ली, और आज उसके पास राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से लेकर तमाम ऐसे लोगो के हाथों सम्मानित हुए सर्टिफिकेट ओर गोल्ड मैडल है, जो कि उसके जिंदगी में सिर्फ कागज के टुकड़े बन कर राह गए हैं।

Bravery Award

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आजमगढ़ का रहने वाला ओम प्रकाश ने 7 साल की उम्र में जो काम कर दिया जिसे कोई सोच भी नही सकता है। 4 सितंबर 2010 को मारुति वैन में बाकी बच्चों के साथ ओम प्रकाश भी जा रहा था। ओम प्रकाश बताता है कि उस समय ड्राइवर और बच्चो को लेकर 10 लोग थे, और मारुति एलपीजी गैस से चल रही थी, और उसमें पेट्रोल भी था।

Bravery Award

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ओम प्रकाश के घर के पास उसमे लीकेज हो गया और उसमे से धुंआ निकलने लगा, और महज 5 सेकेंड बाद ही उसमे आग लग गई। आग लगने के बाद तुरंत वो दरवाजा खोल कर बाहर आया, तब तक ड्राइवर भाग गया, और ओम प्रकाश को लेकर एक से पांच वर्ष तक के 9 बच्चे वैन में रह गए थे। उस वक्त ओम प्रकाश सातवी क्लास में था। उतनी काम उम्र में भी ओम प्रकाश ने हार नहीं मानी। सभी को वैन से बाहर निकाला। उसी कोशिश में ओम प्रकाश बुरी तरह जल भी गया।

Bravery Award

जलने के बाद उसे जिला अस्पताल ले जाया गया। उस दौरान जिला अस्पताल में एमपी, एमएलए सभी मिलने आये और आश्वासन भी दिया। कंडीशन ज्यादा खराब होने के नाते उसे जिला अस्पताल से बीएचयू के लिए रेफर कर दिया। वहां ओम प्रकाश तकरीबन 18 दिन तक रहा। इस दौरान इलाज में काफी खर्च आया। ओम प्रकाश के पिता ऑटो चलाते थे। उस समय तकरीबन ढाई लाख का लोन लेकर उसका इलाज हुआ, लेकिन शासन और प्रशासन की तरफ से या सरकार की तरफ से कोई मदद नही मिली। बस मिला तो एवार्ड।

आज ओम प्रकाश गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय में बीटेक प्रथम वर्ष का छात्र है। यहां एडमिशन भारत सरकार के कोटे से हुआ है, लेकिन फीस वही नॉर्मली बच्चो की तरह लगता है।

Gorakhpur Bravery Award Winner Struggling For Twice Meal in a Day

Gorakhpur Bravery Award Winner Struggling For Twice Meal in a Day

ओमप्रकाश बताता है कि वो 2010 में जला और 2012 में उसे एवार्ड दिया गया। उस समय सपा की सरकार थी। उनसे गुहार लगाया लेकिन कुछ भी मदद नहीं मिला। बीच मे जब ओम प्रकाश ने भिक्षाटन का कदम उठाया तो भिक्षाटन के दौरान जिला अधिकारी ने एक टीम गठित की। उस टीम में सीडीओ और तमाम तरह के अधिकारी उसके घर आये, और मुझसे पूरी जानकारी लेकर गए लेकिन आज तक कुछ नही हुआ, आज पढ़ाई के लिए उसके पास पैसे नही है और न ही उसकी बहादुरी की कद्र है। उसके घर की माली हालत भी ठीक नहीं है। घर में खाने के भी लाले पड़े हैं।

Gorakhpur Bravery Award Winner Struggling For Twice Meal in a Day

Gorakhpur Bravery Award Winner Struggling For Twice Meal in a Day

इस पूरे मामले पर जब गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय इंजीनियर कॉलेज के कुलपति निवास सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि हमारे यहां हर बच्चो को लेकर स्कालरशिप की व्यवस्था है। जो भी छात्र फार्म भरता है, तो उसी वेरिफिकेशन करा कर हम पिछड़ा वर्ग आयोग से उसे पैसा दिलाते हैं। उन्होंने कहा कि ओम प्रकाश के लिए सरकार से बात करके जो भी मदद संभव होगा वो करेंगे।

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