April 18, 2018
गोरखपुर

बजट से गोरखपुर केर्ट उप को क्या है स्टार्ट उप को क्या है उम्मीदें, बता रहे हैं युवा कारोबारी अरुण गुप्ता

बजट से गोरखपुर केर्ट उप को क्या है स्टार्ट उप को क्या है ?

गोरखपुर: महानगर के युवाओं के पास नए आइडियाज और इनोवेटिव सोच की कमी नहीं है। सभी जानते भी है की गोरखपुर का वास्तविक विकास इन्ही फ्रेश आइडियाज और इनोवेटिव सोच से हो सकता है। दुर्भाग्य है की स्टार्टअप अपने आइडियाज को अमलीजामा नही पहना पाते है।

इसका प्रमुख कारण गोरखपुर के बढ़ते और महंगे हो चुके रियल एस्टेट के रेंट को देना गलत नही होगा। इसलिए बजट में उम्मीद है सभी शहरों के स्टार्टअप के लिए इन्क्यूबेशन सेंटर को-वोर्किंग स्पेस सरकार द्वारा खोला जाये जो की नए छोटे और माध्यम स्टार्टअप को कम पैसो में वर्कप्लेस मुहैया करा सके। साथ ही साथ ऐसे स्टार्टअप को गवर्नमेंट की बजट में निर्धारित की गयी फैसिलिटी के बारे में बता सके।

पिछले बजट में स्टार्टअप के लिए सरकार ने प्रावधान बनाये थे जिसमे प्रमुख था की नयी कंपनियों को टैक्स पहले 7 सालों में किन्ही तीन वर्षों में भी तभी देना होगा, जब उनकी स्टार्टअप ‘प्रॉफिट’ में रही हो। पिछले बजट से एक साल पूरा होने पर भी ऐसे ही कई फायदें के बारे में लोगो/स्टार्टअप को जानकारी नही है। जिसे को-वोर्किंग स्पेस के माध्यम से पूरा किया जा सकता है।

साथ ही साथ सभी स्टार्टअप के एक ही छत के नीचे होने से वो आपस में एक दूसरी की हेल्प कर सकेंगे और बड़े उद्यमियों के सामने ‘स्टार्टअप’ अपने प्रोडक्ट/सर्विसेज का प्रेजेंटेशन से इन्वेस्टमेंट मिलने में सहयता मिलेगी। उम्मीद है कि ऐसे को-वोर्किंग स्पेस के लिए बजट पास हो जाये जिससे पुराने उद्योग के बीच स्टार्टअप द्वारा, नए आईडिया और इनोवेटिव ‘प्रोडक्ट/सर्विस’ से गोरखपुर का तेज़ी से डेवलपमेंट हो पाए और रोजगार भी के अवसर प्राप्त हो। अगर इस बजट को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के अंतर्गत लायेंगे तो इसका तेज़ी और बेहतर ढंग से पालन किया जा सकता है।

(ये विचार गोरखपुर के युवा कारोबारी और स्टार्टअप कैफे के फाउंडर अरुण गुप्ता के हैं)

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