April 18, 2018
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रेल बजट में पूर्वांचल, NER को निराशा लगी हाथ, क्या अधर में लटकी सहजनवां दोहरीघाट परियोजना!

रेल बजट में पूर्वांचल, NER को निराशा लगी हाथ

गोरखपुर: गुरुवार को केंद्र सरकार द्वारा पारित आम बजट से पूर्वोत्तर क्षेत्र की आम जनता हतप्रभ है। इस बजट में NER से जुड़े उनलोगों को निराश कर दिया है, जिन्हें इस बजट से कुछ नई ट्रेनें और नई रेल लाइनों की आस थी। विद्युतीकरण को छोड़ दें तो यात्री प्रधान पूर्वोत्तर रेलवे की झोली लगभग खाली ही रह गई है।संरक्षा, सुरक्षा और यात्री सुविधाओं की घोषणाओं ने जरूर कुछ राहत प्रदान की है,पर कोई भी ऐसी घोषणा नहीं है, जिसे गिनाया जा सके।

गोरखपुर-कुशीनगर नई रेल लाइन को छोड़ दिया जाए तो हाल के वर्षो में पूर्वोत्तर रेलवे की कोई भी बड़ी नई रेल परियोजना को हरी झंडी नहीं मिल सकी है। रेलवे बोर्ड ने महत्वपूर्ण सहजनवां-दोहरीघाट और बस्ती-बांसी-कपिलवस्तु नई रेललाइन परियोजना को बजट से पहले ही खारिज कर दिया है। आनंदनगर-महराजगंज-घुघली और खलीलाबाद- बखिरा-बहराइच-भिनंगा नई रेल लाइन पर भी सरकार की नजर नहीं पड़ी है। जबकि, इन सभी परियोजनाओं का डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को भेज दिया गया है।

यही नहीं पड़ोसी मुल्क नेपाल की भी याद नहीं आई है। तत्कालीन रेलमंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने बढ़नी से काठमांडु तक रेल लाइन के लिए सर्वे की घोषणा की थी। रेल मंत्रालय की पहल पर भारतीय क्षेत्र का सर्वे तो पूरा हो गया, लेकिन नेपाल क्षेत्र आज भी अछूता है। इसके पहले भी नौतनवां से बुढ़वल तक रेल लाइन के लिए दो बार सर्वे हो चुका है।

पिछले बजट में ही वाराणसी से आजमगढ़ होते हुए गोरखपुर नई रेल लाइन के लिए सर्व का प्रस्ताव पास हुआ था। लेकिन उसपर नोटिस नहीं ली गई है।इस बजट में परियोजनाएं ही नहीं ट्रेनों के नाम पर भी निराशा ही हाथ लगी है। पूर्वाचल के लोग गोरखपुर से नई दिल्ली के लिए जनसाधारण एक्सप्रेस और दूरंतों की आस लगाए हुए थे।

यही नहीं गोरखपुर से देहरादून चल रही दून एक्सप्रेस को रोजाना करने, कोलकाता जाने वाली ट्रेनों को सुपरफास्ट करने तथा गोरखपुर से पुरी और गोवा के लिए ट्रेनों का इंतजार कर रहे थे। लेकिन पूर्वोत्तर रेलवे के हाथ कुछ भी नहीं आया।

विभाग के जानकारों का कहना है कि सरकार और रेल मंत्रालय अब नई रेल लाइनों पर कम ध्यान देगी। लाभकारी रेल लाइनों पर ही मुहर लगेगी। पूर्वोत्तर रेलवे की सभी नई रेल लाइनें घाटे वाली हैं। यही नहीं अब नई ट्रेनें भी बजट में नहीं शामिल की जाएंगी। रेलवे बोर्ड आवश्यकतानुसार नई ट्रेनों का संचलन कभी भी कर सकता है। वैसे भी रेलवे ट्रैक की क्षमता के अनुसार ट्रेनों की संख्या कहीं अधिक है। नई ट्रेनों के संचलन के लिए गैप (रास्ता), ट्रैक और कर्मचारी नहीं मिल रहे हैं।

पूर्व में घोषित ट्रेनों को चलाना ही मुश्किल पड़ रहा है। पिछले वर्ष लगातार दुर्घटनाओं को संज्ञान में लेते हुए सरकार ने रेल की पटरियों को बदलने और उनकी मरम्मत पर कहीं अधिक जोर दिया है। इसबार नई परियोजनाओं और नई ट्रेनों की बजाए संरक्षा, सुरक्षा और यात्री सुविधाओं का विशेष ख्याल रखा गया है।

बजट में उल्लेख न होने से अधर में लटकीं ये रेल परियोजनाएं

1-सहजनवां दोहरीघाट, 2-बस्ती- बांसी- कपिलवस्तु, 3-घुघली-महराजगंज-आनंदनगर,4-खलीलाबाद-बखिरा-बांसी-बहराइच-भिंगा, 5-महराजगंज-मशरखरीवाघाट,6- पनियहवा- छितौनी-तमकुही रोड,7- भटनी- चूरिया, 8-हथुआ- पचदेवरी, 9-सागर- सुल्तानपुर- मशरख, 10-नौतनवां-भैरहवां,11- वाराणसी से आजमगढ़ होते हुए गोरखपुर,12- बढ़नी-काठमांडु,13- बेल्थरारोड से बकुलहा।

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