April 18, 2018
जायका पूर्वांचल का

VIDEO: कभी खाया है गर्मागर्म रसगुल्ला, अगर नहीं तो आइए अपने शहर में यहाँ

कभी खाया है गर्मागर्म रसगुल्ला, अगर नहीं तो आइए गोरखपुर

हितेश गोस्वामी/प्रीति मिश्रा
गोरखपुर: मिठाई कड़वाहट को दूर करता है। भारतीय भोजन में मिठाई का विशेष स्थान है। मीठा के बिना भोजन तो पूरा ही नहीं माना जाता। यदि कोई मेहमान घर आये तो उसका पहला स्वागत मीठे से ही किया जाता है। शादी, तीज, त्यौहार हर अवसर पर मिठाई के बिना तो सब कुछ सुना ही लगेगा। बात मिठाई की हो और रसगुल्ले का नाम ना आये यह तो हो ही नहीं सकता। रसगुल्ले को मिठाई को राजा कहा जाता है। इस मिठाई में इतना दम है कि यह दो राज्यों के बीच अपने अधिकार को लेकर जंग भी छिड़वा सकता है।

जी हाँ रसगुल्ले के मालिकाना हक़ को लेकर बंगाल और ओडिशा में दिलचस्प लड़ाई भी हो चुकी है। दोनों राज्यों के बीच विवाद इस बात को लेकर था कि रसगुल्ले का आविष्कार कहां हुआ है। खैर आज हम आपको उन दोनों राज्यों के विवाद के बारे में नहीं बल्कि अपने ही शहर के रसगुल्ले के बारे में बताने जा रहे हैं।

आमतौर पर रसगुल्ले को ठंडा करके खाया जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि अपने ही शहर में एक ऐसी जगह है जहाँ गर्मागर्म रसगुल्ला मिलता है। जी हाँ महानगर के पादरी बाजार चौक पर भगत पनीर के नाम से एक दुकान है। इस दुकान पर आपको तमाम तरह की लजीज मिठाइयां मिलेंगी। लेकिन यहाँ के रसगुल्लों की तो बात ही अलग है।

यह दुकान 1995 में शुरू हुई थी और तब से यहाँ रोज 10-12 क्विंटल दूध की खपत रोज होती है। यह दुकान देखने में तो आपको बहुत चमक धमक वाली नहीं लगेगी लेकिन यहाँ की मिठाइयों का स्वाद गजब का है। दुकान के मालिक वीरेंद्र पासवान ने बताया कि रसगुल्ले के अलावा यहाँ गुलाब जामुन, मलाई रोल, हीरामन, पेड़ा, चमचम, रसमलाई और बर्फी भी मिलती है।

वीरेंद्र ने बताया कि यहाँ की मिठाइयों की एक खास बात यह कि इनमे चीनी की मात्रा कम रहती है। मिठाइयों को बनाते समय शुद्धता का विशेष ख्याल रखा जाता है। सभी मिठाई शुद्ध दूध से बनायीं जाती है।

आपको बता दें कि यहाँ के मिठाइयों का दाम भी अन्य जगहों के मुकाबले बहुत कम है। यहाँ आपको एक शानदार रसगुल्ला मात्र 10 रुपए में मिल जाएगा जबकि शहर में किसी अन्य जगह आपको एक पीस रसगुल्ले के लिए तक़रीबन 15 रुपये तो खर्च करने पड़ ही सकते हैं। वहीँ यहाँ रसमलाई की कीमत मात्र 15 रुपये है। दुकान के मालिक ने बताया कि यहाँ प्रतिदिन 10 से 12 कुंतल दूध की खपत हो जाती है जबकि लगन के दिनों में यह मात्रा 20 कुंतल तक बढ़ जाती है।

यहाँ की एक और खास बात यह है कि वीरेंद्र रोज कई खिलाडियों को मुफ्त में दूध भी देते हैं। वह अपने स्तर से खिलाडियों को प्रोत्साहित करने के लिए हरसम्भव मदद करते हैं। वीरेन्‍द्र पासवान अपने युवावस्‍था में राष्‍ट्रीय स्‍तर के खिलाडी बनना चाहते थे, पर हालात कुछ ऐसे बने कि वह दूध बेचने के कारोबार में आ गये। इनके यही काम इनको आज गोरखपुर ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वांचल में सबसे अलग पहचान दिलाता है। अब तक इनकी सहायता से 100 से अधिक युवा खिलाडी सफल होकर राष्‍ट्रीय और अर्न्‍तराष्‍ट्रीय स्‍तर पर खेल रहे हैं या फिर सरकारी नौकरी कर रहे हैं।

राष्‍ट्रीय और अर्न्‍तराष्‍ट्रीय स्‍तर पर पहुंच चुके खिलाडी आज अपने जीवन के संवरने में वीरेन्द्र का महत्‍वपूर्ण योगदान मानते हैं। इनका मानना है कि ऐसे लोग 10-20 और हो जाए तो कई अन्‍य लोगों को भी आगे बढने का अवसर मिलेगा। यहाँ के खिलाडियों का कहना है की उनमे उर्जा तो बहुत है और वह भी बहुत कुछ करना चाहते हैं पर प्रॉपर डाईट नहीं मिलने के कारण उनकी सारी प्रतिभा दम तोड़ देती है।

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