April 18, 2018
फाइनल रिपोर्ट स्पेशल

स्माइल रोटी बैंक के आज़ाद ने बढ़ाया गोरखपुर का मान, राष्ट्रीय युवा आइकन अवार्ड के लिए हुए चयनित

स्माइल रोटी बैंक के आज़ाद ने बढ़ाया गोरखपुर का मान

राकेश मिश्रा
गोरखपुर: Life’s most persistent and urgent question is, ‘What are you doing for others?’ मशहूर अमेरिकी एक्टिविस्ट मार्टिन लूथर किंग जूनियर की इस कहावत का अर्थ है कि ‘जीवन का सबसे दृढ और जरुरी सवाल यह है कि आप दूसरों के लिए क्या कर रहे हैं।’ अगर हम बात करें स्माइल रोटी बैंक ट्रस्ट के मुख्य सचेतक गोरखपुर के युवा आज़ाद पांडेय की तो यह पाएंगे की वो जो भी कर रहें हैं दूसरों के लिए ही कर रहे हैं। और समाज के प्रति उनके इसी समर्पण के कारण एक बार फिर वो सम्मानित होने जा रहे हैं।

आपको बता दें कि अंतरराष्ट्रीय युवा समिति (आईवाईसी) द्वारा प्रत्येक वर्ष हर राज्य से उल्लेखनीय कार्य हेतु एक युवा का चयन किया जाता है। सामाजिक कार्य के क्षेत्र में अंत्योदय के अभिनव प्रयास के लिए आज़ाद पांडे का चयन उत्तर प्रदेश से किया गया है। आज़ाद को यह सम्मान 20 फरवरी को नई दिल्ली में कॉन्स्टीच्यूशन क्लब सभागार में प्रदान किया जाएगा।

बताते चलें कि आज़ाद पाण्डेय मासूम और वंचित बच्चों के सामाजिक उत्थान के लिए स्माइल रोटी बैंक नाम से प्रकल्प चलाकर पिछले 5 वर्षों से अधिक समय से निरन्तर सक्रिय हैं। वह दो बार गोरखपुर से लखनऊ तक बाल भिक्षा मुक्ति के मुद्दे को लेकर साइकिल यात्रा भी निकाल चुके हैं और अनेक अवसरों पर बाल नशाखोरी और बाल भिक्षाटन के खिलाफ सक्रिय मुहिम भी चलाते रहे हैं। आज़ाद को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक पुरस्कारों से सम्मानित भी किया जा चुका है।

Gorakhpur Final Report से बात करते हुए आज़ाद ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय परम पिता परमात्मा, अपने माता-पिता और टीम स्माइल रोटी बैंक के प्रत्येक कार्यकर्ता और शुभचिंतक को समर्पित किया है।

आजाद ने बताया कि गोरखपुर, ग्वालियर, पटना, जबलपुर जैसे शहरों में स्माइल रोटी बैंक को स्थापित करने के बाद अब कल 11 फरवरी को बिहार राज्य के गोपालगंज में एक नया केंद्र खोलने जा रहे हैं।

आजाद ने बताया कि उनक उद्देश्य बाल भिक्षावृत्ति के सामाजिक कलंक को देश से मिटाना है। बाल भिक्षाटन एक अभिशाप है। इसके खिलाफ जंग लड़ने की जरुरत है। रेलवे स्टेशन, मंदिर के बाहर और सार्वजनिक स्थानों पर भीख मांगने वाले बच्चों को उनके घर तक और शिक्षित करना स्माइल रोटी बैंक ट्रस्ट का उददेश्य है। उन्होंने कहा कि बाल भिक्षाटन के पीछे एक बहुत बड़ा रैकेट काम कर रहा है जिससे लड़ने की शक्ति सांसद, विधायकों तक में नहीं है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी बच्चे को 1 रूपया भीख में देता है तो उसका मतलब वह उस रैकेट को मजबूत कर रहा है ना की बच्चे की मदद कर रहा है। आजाद का मानना है कि यदि समाज से बाल भिक्षा को ख़त्म करना है तो पुरे समाज की मानसिकता को बदलना होगा।

आजाद ने बताया कि स्माइल रोटी बैंक की स्थापना रेलवे स्टेशन, मंदिर और सार्वजनिक स्थानों पर भीख मांगने वाले बच्चों को उनके घर तक पहुंचाने और उन्हें मुख्यधारा में जोड़ने के लिए राखी गयी है। संस्था के लोग रोजाना शाम को ऐसे बच्चों को मुफ्त में पढ़ाते हैं। उन्हें एक वक्त का खाना मुहैया कराते हैं। भीख मांगने वाले ज्यादातर बच्चे नशाखोरी के चंगुल में फंस जाते हैं। संस्था के सदस्य उन्हें बुरी आदतों से मुक्त कराने में उनकी मदद करते हैं।

उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों द्वारा छोटी-छोटी मददों के माध्यम से ही इस कारवां को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया जा रहा है।

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