April 18, 2018
टॉप न्यूज़

गोरखपुर उपचुनाव: 34 वर्षो के जीत के रथ का कौन होगा सारथी, क्या होगा आगामी चुनाव का भविष्य!

गोरखपुर उपचुनाव

हरिकेश सिंह
गोरखपुर: सदर लोकसभा सीट पर गोरखपुर उपचुनाव 11 मार्च को घोषित हैं। इस सीट पर अभी तक अधिकांशतः बीजेपी या यूं कहें कि गोरक्षपीठ का ही बोलबाला रहा है। किन्तु अब इस सीट से प्रतिनिधित्व करने वाले सीएम योगी आदित्यनाथ के रिक्त पड़े स्थान पर किसका कब्जा होगा, यह बात भविष्य के गर्भ में है।

बता दें कि आजादी के बाद से संसदीय सीट घोषित हुई गोरखपुर सीट पर वर्ष 1967 में ही पहली बार तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर महतं दिग्विजय नाथ की जीत के कुछ अंतराल बाद लगातार 28 साल तक कब्जा रहा है। इस तरह से इस सीट पर गोरखनाथ मंदिर का कुुुल मिलाकर 34 साल कब्जा बना रहा। इस सीट पर 1967 में हिन्दू महासभा से महंत दिग्विजयनाथ गोरखपुर के सांसद बने।

गोरक्षपीठाधीश्वर महंत दिग्विजयनाथ के बाद वर्ष 1970 में महंत अवेद्यनाथ यहां से सांसद जीते। फिर वर्ष 1971 में यह सीट कांग्रेस नेता नरसिंह नारायण पांडेय के पास चली गई। वर्ष 1977 और 1980 के चुनाव में हरिकेश बहादुर तथा 1984 में मदन पांडेय सांसद चुने गए। वर्ष 1989 में गोरक्षानाथ मंदिर के तत्कालीन पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ यहां से दोबारा सांसद चुने गए। तब से अब तक यह सीट गोरक्षपीठ के पास रही।

वर्ष 1991 और 1996 के चुनाव में भी महंत अवेद्यनाथ ही सांसद चुने गए। स्वास्थ्य खराब होने की वजह से वह 1998 के चुनाव में नहीं उतरे। जिससे उनकी परम्परागत सीट पर उनके उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ भाजपा से चुनाव लड़े और सांसद चुने गए। इसके बाद 1999, 2004, 2009 और 2014 में योगी लगातार सांसद चुने गए और 2017 तक सांसद बने रहे।

19 मार्च 2017 को प्रदेश की कमान सम्हालने के बाद 21 सितम्बर 2017 को योगी ने लोस सदस्यता से त्याग पत्र दे दिया।वैधानिक रूप से उन्होंने सीएम बनने के बाद 8 सितम्बर को विधान परिषद सदस्यता ग्रहण की। अब योगी आदित्यनाथ के इस्तीफा देने के बाद से ही यह सवाल खड़ा है कि उनकी जगह इस सीट से चुनाव कौन लड़ेगा?

योगी आदित्यनाथ लगातार गोरखपुर लोकसभा सीट से न केवल चुनाव जीतते रहे बल्कि एक दो बार अपवाद को छोड़ दिया जाये तो हर बार जीत में वोटों का अंतर पिछली बार के मुकाबले अधिक होता गया। लेकिन अब इस सीट से बीजेपी का झंडाबरदार कौन होगा! और होने वाले उपचुनाव में उसकी जीत का अंतर क्या होगा,यह देखना दिलचस्प होगा।

Related Posts

गोरखपुर उपचुनाव: 34 वर्षो के जीत के रथ का कौन होगा सारथी, क्या होगा आगामी चुनाव का भविष्य!