February 24, 2018
गोरखपुर

बैंक मित्रों ने कहा मोदी सरकार में ग्राहक सेवा केंद्रों का भविष्य खतरे में

बैंक मित्रों ने कहा मोदी सरकार में ग्राहक सेवा केंद्रों का भविष्य खतरे में

गोरखपुर: भारतीय स्टेट बैंक के तकरीबन 273 बैंक मित्रों ने आज पत्रकार वार्ता कर कहा कि 30 करोड़ जनधन खाता खोलकर उसमें 65 करोड़ रुपया जमा कराकर विश्व कीर्तिमान कायम करने वाले लाखों बैंक मित्रों का भविष्य मात्र 17 एनजीओ के हाथों में सौपने के कारण बैंक मित्रों का भविष्य खतरे में है।

बैंक मित्रों ने कहा कि हम ग्राहक सेवा संचालक गण विगत सात- आठ वर्षों से बैंक की सभी सुविधाएं और लक्ष्य ग्रामीण अंचल तक “जहां बैंक नहीं पहुंच पाता था”वहां पर पूरी ईमानदारी के साथ छात्रों, ग्रामीणों तक पहुंचाएं और वर्तमान में हमें बैंक अपने से अलग कर पुनः 8 साल वाले पहले मुकाम पर पहुंचा कर भुखमरी का शिकार बना रही है।

एसबीआई ग्राहक सेवा केंद्र संचालकगण के सदस्यों ने कहा कि याद करें कि 28 जुलाई 2017 को मन की बात में खुद प्रधानमंत्री ने कहा कि 30 करोड़ जनधन खाते में 65 करोड़ रुपया जमा करके हम विश्व कीर्तिमान कायम कर चुके हैं ,किंतु यह कीर्तिमान कराने वाले ग्राहक सेवा केंद्र संचालकों को क्या मिला! इनका कमीशन कम कर दिया गया, बैंक द्वारा सभी सुविधाएं बंद कर दी गई।

इनका कहना था कि नोटबंदी में सबसे ज्यादा जनता के क्रोध के शिकार हम बैंक मित्र ही हुए और अब अचानक खाता बंदी करके हम ग्राहक सेवा केंद्रों की परेशानी तो बढा ही दी,गरीब जनता भी परेशान हो रही है ।उनका अपना ही पैसा दवाई, सिंचाई, शादी ,बीमारी इत्यादि के लिए नहीं मिल पा रहा है ।यह कहां का न्याय व विकास है ।लगभग 50% जनधन खाते बंद हो गए हैं ।एक तरफ तो भाजपा सरकार रोजगार देने की बात करती है ,दूसरी तरफ लाखों बैंक मित्रों का भविष्य मात्र 17 एनजीओ के हाथों में सौंप कर चौपट कर रही है ।

वही उनका कहना था कि आपने ₹5000 वेतन व 500000 ओडी, अलमारी आदि सुविधाएं देने की बात कही और अब कार्य करेंगे बीसी और कमीशन लेंगे एनजीओ। एक तरफ तो सबका साथ सबका विकास का नारा, दूसरी तरफ ग्राहक सेवा केंद्रों को बर्बादी। बैंक द्वारा 1 साल की सहमति पत्र की जगह 2 माह की सहमति पत्र मात्र 28 फरवरी 2018 तक ही क्यों कराया गया! इसे तत्काल प्रभाव से रोका जाए ।

उन्होंने कहा कि आपको बता दें कि जितना कार्य हम ग्राहक सेवा केंद्र संचालक अपने संसाधन से मात्र 0.5 प्रतिशत कमीशन पर करते हैं ,उतना ही कार्य एक ब्रांच चलाने में लाखों रुपए प्रतिमाह खर्च करके 10:00 बजे से 4:00 बजे तक सेवाएं प्रदान करते हैं। हम बीसी सुबह 8:00 बजे से रात्रि 5:00 बजे तक 365 दिन जनता की सेवा करते हैं।आखिर बैंक मित्रों के साथ इतना अन्याय क्यों ,जबकि शिक्षामित्रों ,पंचायत मित्रों, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, प्रेरकों आदि लोगों को सरकारी कर्मचारी की तरह व उनकी सुविधाओं में बढ़ोतरी की जा रही है तो बीसी के अधिकारों में कटौती क्यों !शिक्षा स्वास्थ्य और बैंकिंग सुविधा के रास्ते से ही गांव गरीबी व राष्ट्र के विकास की प्रथम सीढ़ी है।उन्होंने मांग की कि हम ग्राहक सेवा केंद्र संचालक को जैसे हैं वैसे ही कार्य करने दिया जाए और एनजीओ सेवक ना बनाया जाए।

पत्रकार वार्ता में त्रिपुरारी, राजू कुमार, विजय कुमार, राजेश बहादुर सिंह, दिलीप कुमार यादव, कृति कांत शर्मा, सतीश चंद्र गुप्ता, लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, दीनानाथ, अजय सिंह, दुर्गेश लाल, संतोष कुमार, अनिल कुमार ,योगेंद्र कुमार, संदीप ,निजामुद्दीन, राकेश, उदय राज सैनी, राजेश बहादुर सिंह, शैलेंद्र गुप्ता ,धनंजय सिंह ,बृजेश तिवारी, सत्यम कुमार, श्याम धनी पांडेय ,विष्णु दयाल गुप्ता, दुर्गेश कुमार दुबे ,मनोज प्रताप सिंह समेत सैकड़ों लोग मौजूद थे।

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