February 24, 2018
फाइनल रिपोर्ट स्पेशल

जानिये क्यों करें 14 नहीं बल्कि 13 फरवरी को महाशिवरात्रि का व्रत

जानिये क्यों करें 14 नहीं बल्कि 13 फरवरी को महाशिवरात्रि का व्रत

प्रीति मिश्रा
गोरखपुर: महाशिवरात्रि कब मनायी जाये इस पर समूचे देश में ज्योतिष एक मत नहीं दिख रहे हैं। कुछ के अनुसार यह पर्व इस वर्ष 13 फरवरी को मनायी जानी चाहिए तो वहीँ कुछ इसे 14 फरवरी को मनाने को कह रहे हैं। जब इस सम्बन्ध में Gorakhpur Final Report ने प्रसिद्द ज्योतिषाचार्य मनोज दीक्षित से बात की तो उनका कहना था कि इस वर्ष देवों के महादेव भगवान शिव की आराधना को समर्पित महाशिवरात्रि 13 फरवरी को मनाई जाएगी।

क्यों मनाया जाता है शिवरात्रि

श्री दीक्षित ने बताया कि फाल्गुन मॉस के कृष्ण पक्ष में जब त्रयोदशी और चतुर्दशी का मिलाप होता उस दिन महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। उनका कहना था कि उस रात्रि को भगवान शिव का चार प्रहर पूजन और अभिषेक करते हुए रात्रि जागरण करते हुए यह पर्व मनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान शंकर एवं माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था और इसी दिन प्रथम शिवलिंग का प्राकट्य हुआ था।

आचार्य दीक्षित के अनुसार श्रिष्टि के प्रारम्भ में इसी दिन मध्य रात्रि को भगवान शंकर का ब्रह्मा से रूद्र के रूप में अवतरण हुआ था। प्रलय की बेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्माण्ड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं। इसी लिए इसे महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि कहा गया है। उन्होंने बताया कि इसी दिन भगवान शिव का माता पार्वती से विवाह हुआ था। आचार्य मनोज के अनुसार साल में 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

क्यों मनाएं 13 फरवरी को

आचार्य मनोज दीक्षित के अनुसार मंगलवार 13 फरवरी को रात 10.35 बजे से त्रयोदशी और चतुर्दशी का मिलाप हो रहा है इसलिए शिवरात्रि का पर्व 13 फरवरी को मनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ विद्वान जो यह कह रहे हैं कि महाशिवरात्रि 14 फरवरी को मनाया जायेगा वो गलत हैं क्योंकि 14 फरवरी को रात्रि 12.47 बजे से अमावस्या से चतुर्दशी युक्त हो रही है और अमावस्या युक्त तिथि का निषेध माना गया है। इसलिए मंगलवार को त्रयोदशी युक्त चतुर्दशी है, इसलिए महाशिवरात्रि का पर्व इसी दिन मनाया जाएगा।

क्या होगा राशियों पर प्रभाव

आचार्य मनोज के अनुसार जिनकी कुंडली में अनिष्ट ग्रहों की छाया, मारकेश की स्थिति, राहु केतु जड़ित काल , सर्प दोष, राहु केतु की दशा और शनि की दशा हो उन्हें महाशिवरात्रि को रात्रि में चार प्रहर की पूजा और रुद्राभिषेक करना चाहिए। इससे रोग, दोष और पीड़ा का परिहार होगा।

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