February 24, 2018
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महाशिवरात्रि पर पूरा जनपद हुआ भोले बाबा का भक्त, मुंजेश्वर नाथ मंदिर पर उमड़ी भक्तों की भीड़

महाशिवरात्रि पर मुंजेश्वर नाथ मंदिर पर उमड़ी भक्तों की भीड़

गोरखपुर: आज महा शिवरात्रि पर्व पर जनपद के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। लोग अपने आराध्य की पूजा करने को प्रातः काल से ही शिवालयों पर कतार लगाए खड़े थे। भोले बाबा के दर पर भक्तो की कतार लगाकर दर्शन करने को उमड़े श्रद्धालु। जी हां ! वैसे तो पुरे देश में महाशिवरात्रि की धूम है, लेकिन गोरखपुर के तमाम प्राचीन मन्दिर जैसे महादेव झारखंडी, पिपराइच के बाबा मोटेश्वर नाथ, भौवापार के बाबा मुंजेश्वर नाथ मंदिर समेत कई शिव मंदिरों पर अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली। जहां शिवभक्त अपने आराध्य को विविध रूप से पूजन कर रहे थे। इसी क्रम में आज बात करते है, भौवापार के बाबा मुंजेश्वर नाथ मंदिर की।

महाशिवरात्रि के अवसर पर भौवा पार मंदिर पर हर हर महादेव के जय घोष से पूरा परिसर शिव मंय हों गया।भारी संख्या में पहुचे श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक करके मन्नत मांगी । भौवापार स्थित मुंजेश्वर नाथ मंदिर सांस्कृतिक धार्मिक धरोहर का एक अंश है ।जो अपनी ऐतिहासिकता एवं मान्यता के चलते लोगों में श्रध्दा और विश्वास का प्रतीक बन चुका है।मन्दिर का कोई एक मुख्य पुजारी नही है। मन्दिर के बगल की जमीन गिरि परिवार को दे दिया गया है।वर्तमान में लगभग 30 परिवार दिनरात मन्दिर की व्यवस्था को देखते हैं। लगभग 600 वर्षों से खुले आसमान के नीचे मुञ्जेश्वर नाथ जी भक्तो की आस्था और विश्वास के केन्द्र बने हुए हैं।

गोरखपुर जनपद से 13 किमी दूर दक्षिण मे स्थित एतिहासिक गांव भौवापार स्थित है ।ऎसा माना जाता है कि जब-जब लोगो ने छत लगाने का प्रयास किया छत टूट गया। ऎसा करने वालो को नुकसान उठाना पड़ा! लोगो को यह विश्वास है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने पर मन की सभी मुरादें पूरी होती है!

किवदंती है कि मुंज की झाड़ियो से निकले थे बाबा मुञ्जेश्वर नाथ!

जबकि शिवलिँग के विषय में अनेक किँवदंतियां प्रचलित हैं ,लेकिन “नाग कौशलोत्तर” नामक प्राचीन ग्रंथ मेँ लिखा गया है कि खेत जोतते समय मजदूरों के फावड़े से ज्यों ही पत्थर पर चोट लगी। वहां से दूध की धारा बहने लगी। सतासी नरेश महाराज मुंज ने मूर्ति को अन्यत्र ले जाने का प्रयास किया परन्तु वे सफल नहीँ हुए। दूसरे दिन स्वप्न मेँ भगवान अनादि देव शिव शंकर ने कहा कि मेरे लिए मंदिर और जलाशय एवं पुजारियोँ के जीविकोपार्जन हेतु अगल बगल जमीन दे दो। मैँ यही निवास करूंगा। स्वप्न के अनुसार राजा ने अगल -बगल की सारी जमीन मंदिर परिसर को दे दी । मंदिर और जलाशय आदि का निर्माण कराये , इसी लिये राजा मुंज के नाम पर कालान्तर मेँ यह मंदिर मुंजेश्वरनाथ (भौवापार) के नाम से विख्यात हो गया।

क्षत्रिय राजा मुंज के नाम पर पड़ा मुञ्जेश्वर नाथ मन्दिर

स्थानीय लोगों के मुताबिक एक दूसरी किवदंती है कि भौवापार में भर राजाओ का शासन था,खेती के लिए मुंज की झाडियों को साफ कराया जा रहा था, मजदूरो का फावड़ा अचानक एक पत्थर से टकराया और रक्त धारा बहने लगी, मजदूरों मे भगदड़ मच गया! रात को भर राजा के स्वप्न मे शिव जी ने दर्शन दिया और मन्दिर बनाने की बात कही, अगले ही दिन से मुंज की झाड़ियो को साफ कर पूजा अर्चना शुरू कर दिया गया, धीरे धीरे मन्दिर निर्माण हुआ, मूंज की झाड़ियो से निकलने के कारण ही मन्दिर का नाम मुञ्जेश्वर नाथ पड़ा!मंदिर में पूजा अर्चना से सभी मनौतियां पूरी होती है।भगवान अनादि देव शिव की असीम कृपा से श्रध्दालुओँ की हर प्रकार की मनौती यहां पूरी होती है।

लगभग 20 एकड़ में स्थित मुंजेश्वर नाथ के प्रांगण में विशाल शिव सरोवर के साथ राम-जानकी मन्दिर, हनुमान मन्दिर, गणेश मन्दिर, दुर्गा मन्दिर, पार्वती मन्दिर, संतोषी माता मन्दिर, काली माता मन्दिर, साईं बाबा मन्दिर भक्तो द्वारा स्थापित किया गया है।इस पवित्र भूमि पर महाशिवरात्रि, दशहरा ,तथा अधिक मास के अवसर पर विशाल मेला लगता है तथा प्रत्येक सोमवार को हजारो नर-नारी भूतनाथ अनादि देव शिवशंकर को नमन करते हैं एवं मनौतियां चढ़ाते हैं।

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