April 17, 2018
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गोरखपुर उपचुनाव: उपेन्द्र दत्त शुक्ला होंगे भाजपा के प्रत्याशी, संगठन के कर्मयोगी और ब्राह्मण चेहरे के रूप में बनी है पहचान

गोरखपुर उपचुनाव: उपेन्द्र दत्त शुक्ला होंगे भाजपा के प्रत्याशी

गोरखपर: योगी आदित्य नाथ के इस्तीफे के बाद खाली हुई गोरखपुर लोकसभा सीट पर होने जा रहे उप चुनाव के लिए बीजेपी ने क्षेत्रीय अध्यक्ष उपेंद्र दत्त शुक्ला को प्रत्याशी घोषित किया है। वहीं उपेंद्र दत्त शुक्ला की संगठन और कार्यकर्ताओं में अच्छी पकड़ है।पूर्वांचल में उनकी पहचान ब्राह्मण चेहरे के रूप में होती हैं। जो गोरखपुर से राज्यसभा सांसद और वर्तमान में केंद्र में मंत्री शिव प्रताप शुक्ला के बेहद करीबी बताए जाते है।

बता दें कि भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष उपेंद्र दत्त शुक्ला काफी लंबे समय से पार्टी और जनता के बीच सक्रिय हैं। लेकिन अब तक उन्हे एक जन प्रतिनिधि के तौर पर जीवन व्यतीत करने का मौका नही मिल पाया है। हालांकि एक दो बार वह कौड़ीराम विधानसभा क्षेत्र से अपना भाग्य भी आजमाए,किन्तु पार्टी का सहयोग उनको टिकट नहीं मिल पाया। उनकी जगह किसी और को पार्टी का सिम्बल मिल गया था।

लेकिन ये भी सही है जब जब उन्होंने सम्बन्धित विधानसभा क्षेत्रों में अपना भाग्य आजमाया तब तब वह अपने विरोधियों पर काफी भारी पड़े थे। हालांकि अबकी बीते विधानसभा चुनावों में सहजनवां से उनके नाम की चर्चा चल रही थी किन्तु वर्तमान विधायक शीतल पांडेय के नाम पर आम सहमति बनते ही कहानी खत्म हो गयी। इसके बावजूद वह बीजेपी के साथ हमेशा लगे रहे और पार्टी में क्षेत्रीय अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण ओहदे को सम्हालते रहे। वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनावों में इन्होंने क्षेत्र की सभी सीटों पर भगवा झंडा फहराने में कोई कोर कसर नही छोड़ी थी। ऐसे में वर्षो से सतत प्रयत्नशील रहे उपेंद्र दत्त शुक्ला को पार्टी हाईकमान व स्थानीय पदाधिकारियों की सहमति के बाद गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में प्रत्याशी घोषित किया गया है।

बता दें कि आज चर्चाओं का केंद्र बिंदु बना गोरखपर संसदीय सीट तीन दशक से गोरक्षपीठ के कब्जे में रहा है।इस सीट पर पहली बार 1952 में चुनाव हुआ और कांग्रेस ने जीत दर्ज की। इसके बाद गोरक्षनाथ पीठ के महंत दिग्विजय नाथ ने इस सीट को 1967 में बतौर निर्दलीय चुनाव जीता। उसके बाद 1970 में योगी आदित्य नाथ के गुरु अवैद्यनाथ ने निर्दलीय जीत दर्ज की।

1971 से 1989 के बीच एक बार भारतीय लोकदल और कांग्रेस का इस सीट पर कब्ज़ा रहा।लेकिन 1989 के बाद से सीट पर फिर से गोरक्षपीठ का कब्ज़ा हो गया।यहां से गोरक्षपीठ के महंत अवैद्यनाथ 1998 तक सांसद रहे।उनके बाद 1998 से लगातार पांच बार उनके उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ का कब्ज़ा रहा।अब योगी आदित्यनाथ के इस सीट से त्यागपत्र देने के बाद घोषित उपचुनाव में मतदान 11 मार्च को होंगे और इसका नतीजा 14 को आएगा।

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