April 17, 2018
गोरखपुर

गोरखपुर: जो काम वीरेंद्र शाही, विनय शंकर, जमुना निषाद नहीं कर पाए, उसे 29 साल के एक इंजीनियर ने कर दिखाया

गोरखपुर: जो काम वीरेंद्र शाही, विनय शंकर, जमुना निषाद नहीं कर पाए, उसे 29 साल के एक इंजीनियर ने कर दिखाया

गोरखपुर: सदर लोकसभा सीट 30 साल के तिलिस्म को जिस शख्स ने तोडा है उसका नाम है इं. प्रवीण कुमार निषाद उर्फ सन्तोष। एक महीने पहले जिस व्यक्ति के नाम की गाहे बगाहे ही चर्चा होती थी उस व्यक्ति ने वो कर दिखाया जो गोरखपुर में बड़े-बड़े ना कर पाए। बाहुबली वीरेंद्र प्रताप शाही हो या भोजपुरी फिल्मों के बड़े स्टार मनोज तिवारी। हाता परिवार के विनय शंकर तिवारी हो या निषाद राजनीति के प्रणेता स्वर्गीय जमुना निषाद। इन सभी लोगों को गोरखपुर लोक सभा सीट पर मंदिर के महंत के हाथों मुंह की खानी पड़ी थी।

जो काम बड़े-बड़े नहीं कर पाए उसे उसे कर दिखाया 29 वर्षीय इंजीनियर प्रवीण निषाद ने। समाजवादी पार्टी के इस प्रत्याशी ने बसपा के सहयोग से भाजपा प्रत्याशी उपेंद्र शुक्ल को पटखनी दी है। इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त और कुशल नेतृत्वकर्ता व्यक्तित्व वाले इस युवक ने आज गोरखपुर की राजनीति में लगभग तीन दशक के एक मिथक तोड़ दिया।

बता दें कि आज लोकसभा उपचुनाव की मतगणना में शीर्षस्थ मत पाकर विजयश्री हासिल किए इं प्रवीण निषाद को राजनीतिक क्षमता उनके पिता और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संजय निषाद से विरासत में मिली है। इस चुनाव के पूर्व के वर्षों में प्रवीण ने अपनी इंजीनियरिंग की शिक्षा समाप्ति के पश्चात पिता के बनाये निषाद पार्टी में बतौर प्रभारी और वक्ता के तौर पर बीते विधानसभा चुनावों में सभी दलों में अपनी जाति की पकड़ से दमदार सेंधमारी किया था,यहां तक कि कई विपक्षी दलों की नींद भी उड़ा दिया।जिससे भाजपा को छोड़कर सभी दल बुरी तरह पराजित हो गए।

समाजवादी पार्टी के 29 वर्षीय प्रत्याशी इं. प्रवीण उर्फ सन्तोष निषाद ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में प्रौद्योगिकी स्नातक की उपाधि हासिल की है।जातीय मतों की सियासत के माहिर इस नेता ने लोकसभा उपचुनाव में दिमाग लगाते हुए अपनी माँ और छोटे भाई को भी बतौर निर्दल प्रत्याशी चुनाव लड़ाया।जिससे हर विधानसभा क्षेत्र में छिटके जातिगत मत कहीं और न जाने पाएं।

इनके पिता व निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संजय निषाद की बात करें तो पूर्वांचल में निषाद जाति के अगुआ कहे जाने वाले स्व.यमुना निषाद के निधन पश्चात आयी रिक्ती को डॉ संजय निषाद ने आरक्षण की मांग करते हुए भर दिया। जिसका शौर्य प्रदर्शन उन्होंने लगभग दो वर्ष पूर्व सहजनवां में कसरौल में दिखाया। जहां हुए गोली कांड में एक युवक की मौत के बाद डॉ संजय निषाद समेत कई अन्य भी जेल गए।

इसके बाद से ही शुरू हुआ निषाद जाति के वोटों का उद्भव और 2017 के विधानसभा चुनावों में यह पूरी तरह से चरम पर आ गया। जिसे देखते हुए इस चुनाव में भाजपा की प्रमुख प्रतिद्वंदी दल सपा ने पहले इन्हें अपना प्रत्याशी बनाने का न्यौता दिया। किन्तु मजबूरीवश यह उक्त निमन्त्रण को अस्वीकार कर अपने ज्येष्ठ पुत्र प्रवीण का नाम आगे किये,जिसे देखते हुए विधानसभा क्षेत्रों में जातीय बहुलता के आधार पर प्रवीण को उम्मीदवार घोषित किया गया। इनके परिवार से चुनाव लड़ने वालों मे इं. प्रवीण कुमार निषाद की मां श्रीमती मालती देवी व भाई इं. श्रवण कुमार निषाद भी थे।

Related Posts

गोरखपुर: जो काम वीरेंद्र शाही, विनय शंकर, जमुना निषाद नहीं कर पाए, उसे 29 साल के एक इंजीनियर ने कर दिखाया