April 17, 2018
गोरखपुर

11 माह पूर्व पड़ी थी जीत की नींव, डा.अय्यूब के मसौदे पर बबुआ-बुआ की मोहर से जीत हुई आसान

11 माह पूर्व पड़ी थी जीत की नींव, डा.अय्यूब के मसौदे पर बबुआ-बुआ की मोहर से जीत हुई आसान

गोरखपुर: गोरखपुर-फूलपुर लोकसभा उपचुनाव की ऐतिहासिक चुनाव में जीत का फार्मूला पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. मोहम्मद अय्यूब अंसारी ने ग्यारह माह पूर्व तैयार किया था। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के सहमति की मोहर भी ग्यारह माह पूर्व ही लग गयी थी। बसपा सुप्रीमो मायावती की मोहर चुनाव से चंद दिनों पूर्व डा. अय्यूब की पहल पर लगी थी। बकौल डा. मोहम्मद अय्यूब इस चुनाव में सपा समर्थित सभी पार्टियां बाराती की हैसियत में थी और इस बारात के दूल्हा निषाद पार्टी के अध्यक्ष डा. संजय कुमार निषाद थे। डा. संजय निषाद न होते तो न यह फार्मूला बन पाता, न ऐतिहासिक जीत मिल पाती, न ही 2019 व 2022 के चुनाव के लिए वैकल्पिक दिशा मिल पाती।

पीस पार्टी के अध्यक्ष डा. मो. अय्यूब अंसारी व निषाद पार्टी के अध्यक्ष डा. संजय कुमार निषाद ने रविवार को गोरखपुर में खास बातचीत के दौरान कहा कि उन्हें पूरा यकीन है कि 2019 का लोक सभा चुनाव व 2022 का विधानसभा चुनाव हम सब मिलकर लड़ेगे और मिली जुली सरकार बनायेंगे और देश में जाति व धर्म के नाम पर आतंक का खात्मा होगा। एक ऐसा भारत बनेगा, जिसमें कमजोर लोग सम्मान और अधिकार के साथ जिंदगी गुजार सकेंगे।

डा. संजय कुमार निषाद ने कहा कि गोरखपुर-फूलपुर उपचुनाव की जीत ऐतिहासिक है। इस चुनाव के साथ सपा, बसपा, पीस पार्टी, निषाद पार्टी सहित कुछ अन्य पार्टियों में दोस्ती की नींव पड़ी है। वह आने वाले  दिनों में और मजबूत होगी। 2019 के लोकसभा चुनाव व यूपी के विधानसभा चुनाव में यह सियासी दोस्ती निर्णायक साबित होगी और बीजेपी का पूरी तरह सफाया हो जायेगा।

डा. अय्यूब ने खुलासा किया कि 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह तय हो गया था कि अब यहां चुनाव होगा। लिहाजा सरकार बनने के एक माह बाद ही अखिलेश यादव से बात करनी शुरू कर दी थी और उनके सामने जीत का फार्मूला पेश कर दिया था। अखिलेश यादव को रजा मंद भी कर लिया था। डा. अय्यूब का फार्मूला था कि निषाद पार्टी के अध्यक्ष का लड़का प्रत्याशी बने। सपा उसे टिकट दे। डा. अय्यूब ने अखिलेश यादव को निषाद सहित अन्य जाति समीकरण भी बताया साथ ही यह भी बताया कि अगर आप पूरी ताकत भी लगा देंगे तो भी यह दोनों सीट निषाद व पीस पार्टी के सहयोग के बगैर नहीं जीत पायेंगे।

डा. अय्यूब ने बताया कि अखिलेश को गोरखपुर सीट पर जीत की बिल्कुल भी आशा नही थीं, जबकि फूलपुर सीट पर आशा थी कि जीत अगर मिलेगी तो यहीं से मिलेगी। तब डा. अय्यूब ने कहा कि बिना निषाद-पीस पार्टी के जीत कहीं  मुमकिन नहीं है। निषाद-पीस पार्टी दोनों जगह चुनाव लड़ेगे। तब जाकर अखिलेश ने तमाम विकल्पों पर गौर करने के बाद मेरे जीत के फार्मूले पर सहमति की मोहर लगा दी। उन्होंने कहा कि सभी तरह का गुणा-गणित कर अनुमान लगा लिया था कि गोरखपुर में डेढ़ लाख वोट से सपा गठबंधन को जीत मिलेगी, लेकिन प्रशासन की काफी कोशिशों के बाद भी आखिर जीत हमें ही मिली। अखिलेश यादव के साथ समझौते के दौरान यह तय हुआ था कि तय प्रत्याशी के बारे में कोई घोषणा नहीं की जायेगी। तीनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व के अलावा किसी को नही मालूम था कि प्रत्याशी ग्यारह माह पूर्व चुन लिया गया है।

एक खास रणनीति के तहत इं. प्रवीण कुमार निषाद को प्रत्याशी बनाया गया। ताकि बीजेपी सपा गठबंधन प्रत्याशी को गंभीरता से न ले पाये। पूरे साल हम साथ-साथ चुनाव लड़ने की बात करते रहे लेकिन रणनीति का खुलासा नहीं किया। अंत समय में सपा गठबंधन प्रत्याशी की घोषणा हुई। डा. अय्यूब ने कहा कि हमें बिना बसपा के समर्थन से चुनाव जीतना मुश्किल लग रहा था। अखिलेश यादव के पास ऐसा कोई रास्ता नहीं था, जो मायावती को समर्थन के लिए रजामंद करवाए तब वो मायावती से मिले।

उन्होंने बताया कि बसपा सुप्रीमो मायावती से बात की और समर्थन के लिए मना लिया। बीजेपी को छोड़िए यहा तक कि अखिलेश को भी यकीन नहीं हुआ कि मायावती मान गयी है। चुनाव के चंद दिन पहले मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस की और समर्थन पर रूख स्पष्ट किया। बसपा ने अपने इतिहास में इस तरह का निर्णय पहली बार लिया। चुनाव से चंद पहले बीजेपी ने मास्टर स्ट्रोक चला। सपा प्रत्याशी के पिता से बीजेपी ने समझौता, लेन-देन की बात पर चर्चा भी की। बकौल डा. अय्यूब अगर बीच में वो न होते तो बहुत अनहोनी हो गई होती। इस जीत का क्रेडिट अखिलेश यादव व मायावती को जाता है। जिन्होंने उनके जीत के फार्मूले पर समर्थन की मोहर लगाई। आगे के चुनावों में यह महागठबंधन बरकरार रहने की उम्मीद है।

डा. अय्यूब को मलाल भी है कि यह महागठबंधन अगर पहले हो गया होता तो देश व प्रदेश की सियासत का रूख कुछ और ही होता। डा. अय्यूब ने बताया कि वह वर्ष 2013 से ही इस तरह का महागठबंधन चाहते थे, लेकिन सपा व बसपा अपनी ताकत के रौब में कुछ अलग ही गुमान कर बैठे थे। जिसका खामियाजा दोनों ने भुगता। डा. अय्यूब की छह साल की मेहनत रंग लायी और सपा-बसपा की पुरानी दुश्मनी भी खत्म हो गई और गोरखपुर व फूलपुर के लोकसभा उपचुनाव में ऐतिहासिक जीत भी हासिल हुई। 14 मार्च को गोरखपुर व फूलपुर में एक सियासी तारीख लिखी गई। जिसे भुलाया नहीं जा सकता है। इन सभी के बीच डा. अय्यूब अंसारी व डा. संजय कुमार निषाद की दोस्ती ने नई सियासी इबारत लिखी जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

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