April 17, 2018
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निजीकरण के विरोध में उतरे विद्युतकर्मी, अन्य संगठनों ने दिया समर्थन

गोरखपुर: प्रदेश में बेहतर विद्युत आपूर्ति के लिए शासन द्वारा पांच जिलों की विद्युत व्यवस्था निजी हाथों में सौंपने के खिलाफ विद्युत कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। जिसके तहत आज हजारों विद्युत कर्मियों ने धरना प्रदर्शन और मानव श्रृंखला बनाकर अपना विरोध प्रदर्शित किया। विद्युत कर्मियों के इस आंदोलन के कारण सारा विभागीय कामकाज ठप हो गया है। गौरतलब है कि सरकार द्वारा बेहतर विद्युत आपूर्ति के लिए प्रदेश के पांच जिलों लखनऊ, वाराणसी, मेरठ, मुरादाबाद व गोरखपुर को निजीकरण हेतु दे दिया है।इस फैसले के बाद से ही विरोध शुरु हो गया और अधिकारी व कर्मचारी लामबंद होने लगे।

गोरखपुर सहित पांच शहरों के बिजली विभाग के निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति गोरखपुर के तत्वाधान में सभी विद्युत कर्मचारी सोमवार को कार्यालय पर इकट्ठा हुए और धरने पर बैठ गए। वह सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे।धरने पर उ0प्र0 डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के जनपद सचिव राघवेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा निजीकरण का विरोध करते हुए बताया गया कि सरकार की यह नीति कर्मचारी विरोधी है। इस दमनकारी नीति के विरोध में हमारा संगठन विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति के साथ किसी भी स्तर का विरोध करने को तैयार है।

विद्युत जेई संगठन के अमित प्रताप सिंह ने कहा कि जब तक सरकार अपने फैसलों को वापस नहीं लेगी कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा कुछ जिलों में निजी हाथों में विद्युत व्यवस्था को सौंपा जाना विभाग के साथ धोखा है। इसके खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। विद्युत आपूर्ति को छोड़कर कोई कार्य नहीं होगा। राजस्व वसूली, बिल रिविजन सहित के कार्य बाधित रहेंगे।

जबकि धरने पर पहुंचे राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष रूपेश श्रीवास्तव, उद्यान विभाग के अध्यक्ष मुजरात खान, सिचाई विभाग के सरजू पासवान आदि ने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि गोरखपुर समेत पूरे प्रदेश में यह आन्दोलन दिन-प्रतिदिन सफलता की नई ऊंचाई छू रहा है।विधान सभा में आमजनता के हित में विपक्ष पार्टी द्वारा निजीकरण का विरोध किया जाना एवं सदन से वाक आउट किया जाना इसका प्रमाण है।

इसी क्रम में आज हजारों कर्मचारियों ने कई किमी की मानव श्रृंखला बनाकर मोहदीपुर स्थित मुख्य अभियन्ता कार्यालय से मोहद्दीपुर चौराहा होते हुएयूनिवर्सिटी चौराहे तक प्रदर्शन किया गया। इस मानव श्रृंखला में कई सामाजिक एवं कर्मचारी संगठनों ने भी जोर-शोर से भाग लिया।

इस दौरान सड़क से गुजरने वाले नागरिकों ने निजीकरण को आत्मघाती बताया तथा इसके विरोध प्रदर्शन को सही एवं उचित बताया। जनता द्वारा यह भी कहा गया कि सरकार भी घाटे में चल रही है तो विधायकों एवं सांसदों के साथ-साथ विधान सभा और संसद का निजीकरण पहले किया जाना चाहिए। इसी क्रम में आज उप्र डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ एवं कायस्थ उत्थान समिति द्वारा लिखित समर्थन दिया गया।

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