फाइनल रिपोर्ट स्पेशल Archives - Gorakhpur News in Hindi | Latest गोरखपुर न्यूज़ | Gorakhpur Final Report

GFR Desk4th December 2017
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आयुष द्विवेदी
गोरखपुर: स्वच्छ भारत मिशन के तहत देश में बहुत सारे कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। केंद्र सरकार की इस बहुप्रचारित योजना में प्रदेश की सरकार भी बढ़ चढ़ कर भाग ले रही है।

केंद्र सरकार ने अपने स्वच्छ भारत अभियान के प्रचार प्रसार के लिए समूचे देश में लगभग हर क्षेत्र के नामी गिरमिल लोगों को इसका ब्रांड एम्बेसडर बनाया है। देश के बहुत सारे सेलेब्रेटी इसका प्रचार प्रसार करते देखे जा सकते हैं।

सूबे की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक कदम आगे जाते हुए प्रदेश में सरकार द्वारा बनाये गए शौचालयों को एक नया नाम ‘इज्जत गहर दे दिया है। हम रोज अखबारों और टेलीविजन पर देखते हैं कि ‘कलावती ने दिखाई हिम्मत, शौचालय नहीं तो शादी से किया इंकार।’

यह जरूर है कि लोग जागरूक हो रहे है। लेकिन यहाँ एक बड़ा सवाल है कि क्या केंद्र और राज्य सरकार अपनी तमाम कोशिशों के बाद भी लोगों की सोच को बदल पा रही है।

सरकार की लगातार कोशिशों के कारण गाँव-गाँव शौचालय बन तो गए हैं, लेकिन अभी भी काफी संख्या में लोग बाहर खेतों में शौच करने जा रहे हैं। पूर्वांचल में तमाम घर ऐसी हैं जिन्हे शौचालय बनवाने के लिए सरकार के मदद की जरुरत नहीं थी। वो लोग खुद संपन्न हैं और उन्होंने अपने घरों में शौचालय बनवा भी रखा है लेकिन उसका इस्तेमाल नहीं करते।

गाँव में तमाम घरों में लोग अभी भी खेत में ही शौच करने जाते हैं। क्या कारण है लोग शौचायल में ना जाकर बाहर जाते हैं? जब इस बारें में जानने की कोशिश की गयी तो उनलोगों का जवाब बहुत अजीबो गरीब मिला।

बहुत सारे लोग पुराने परम्परा से बाहर नहीं आ पा रहे है या यूँ कहें कि आना ही नहीं चाहते। इनमे बुजुर्ग सबसे ज्यादा हैं। कुशीनगर के एक बृद्ध गया प्रसाद को ही लें। उनका कहना है की जब शुरू से ही शौच करने बाहर जा रहे हैं तो अब क्यों ना जाए। आपको बता दें की यह अपने घर में शौचालय होने के बाद भी उसका इस्तेमाल नहीं करते हैं। उनका कहना है की बाहर स्वस्थ वातावरण मिलता है, खुले में शौच करने से पेट साफ हो जाता है जबकी शौचलय में बैठने से अजीब लगता है।

एक और बात गॉवों में देखने को मिल रही है वो यह है कि जो घर से ठीक ठाक है और जिनके यहाँ शौचालय है लेकिन उन घरों के लोग भी खुले में शौच करने जाते है। यह बात केवल बृद्धों में ही नहीं बल्कि घर की महिलाएं भी जाती है।

महिलाओं का कहना है बाहर जाने से स्वच्छ वातावरण मिलता है। साथ-साथ ही वो अपना कुछ दर्द भी गाँव की अन्य महिलाओं से बाट लेती हैं।

मतलब साफ है गांव के बहुत सारे लोग जो संपन्न है और उनके घर शौचायल भी है वह खुले में शौच करने को अपने स्वास्थ्य से जोड़कर देखते हैं। जबकी रोज हम टीवी पर और अखबारों में पढ़ते है की खुले में शौच करने से नुकसान है लकिन इसका असर इन लोगों पर नहीं होता है और यह अपने धुन में मस्त हैं।


GFR Desk3rd December 2017
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आयुष द्विवेदी
गोरखपुर: महाराजगंज की सियासत की बात करें और अमरमणि त्रिपाठी के परिवार का उल्लेख न हो ऐसा हो नहीं सकता। महराजगंज में इस परिवार को राजनीतिक रूप से स्थापित किया पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी ने और अब उस विरासत को बखूबी ना केवल संभाल रहे हैं बल्कि उसको आगे बढ़ा रहे हैं उनके पुत्र अमनमणि त्रिपाठी।

इस साल की शुरुआत में हुए विधान सभा चुनावों में कई दिक्कतों के बाद भी अमनमणि ने नौतनवा विधान सभा सीट जीतकर यह दिखा दिया कि इस जनपद की राजनीति में उनको कमतर नहीं आँका जा सकता।

2016 में पत्नी सारा की हत्या के आरोप में सीबीआई द्वारा अमनमणि त्रिपाठी के गिरफ्तार होने के बाद ऐसा लग रहा था कि अमरमणि त्रिपाठी और उनके परिवार के सियासी भविष्य पर ग्रहण लग गया। उसके बाद सपा ने नौतनवा से अमनमणि को प्रत्याशी जरूर बना दिया था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद पार्टी ने उनका टिकट काट दिया।

फिर आया वो दौर जिसमे जनपद की राजनीति में हासिये पर जा रहे इस परिवार ने जोरदार वापसी की। सभी अटकलों और राजनीतिक पंडितों को झुठलाते हुए अमन मणि ने नौतनवा विधान सभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की।

मोदी लहर में पूरे प्रदेश में तीन निर्दल विधायक निर्वाचित हुए और अमनमणि उनमे से एक थे। महराजगंज जनपद की पांच सीटों में से चार पर भाजपा ने तो एक सीट नौतनवा पर अमनमणि ने कब्ज़ा किया। ताजा-ताजा ख़त्म हुए नौतनवा और सोनौली में अपने उम्मीदवारों को जीत दिला अमनमणि ने एक बार फिर साबित किया कि विधान सभा चुनाव की जीत कोई तुक्का नहीं थी।

अमनमणि के करिश्मे का यह आलम रहा कि नौतनवा में तो भाजपा लड़ाई में ही नहीं रही और उसे तीसरे स्थान से ही संतोष करना पड़ा। नौतनवा नगरपालिका से निर्दल प्रत्याशी मोहम्मद कलीम ने सपा के रजनी जायसवाल को 2963 मतो से हराया तो वहीँ सोनौली नगर पंचायत से निर्दल प्रत्यशी कामना तिवारी ने भी जीत दर्ज की। आपको बता दें कि दोनों प्रत्याशियों को अमनमणि ने चुनाव लड़ाया था।

यही नहीं निकाय चुनाव के मतदान के तीन दिन पहले नौतनवा में निरहुआ के रोड शो के दौरान भाजपा प्रत्याशी जगदीश गुप्ता के गाड़ी का शीशा टूटने पर भाजपा व अमनमणि समर्थक निर्दल प्रत्याशी गुड्डू खान के समर्थक आपस में भिड़ गए थे। बाद में भाजपा प्रत्याशी के तहरीर पर नौतनवा पुलिस ने विधायक अमनमणि त्रिपाठी, भोजपुरी कलाकार दिनेश लाल यादव, निवर्तमान चेयरमैन के पति गुड्डू खान सहित दो दर्जन नामजद व 100 अज्ञात के विरुद्ध अचार संहिता का उलंघन तथा विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

इन सारी घटनाओं के बीच एक बात की चर्चा करना बहुत जरुरी है। विधायक बनने के बाद से ही अमनमणि ने सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ से नजदीकी बढ़ाने की हर कोशिश की और इसमें वो कामयाब भी हुए। चाहे मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ को गोरखनाथ मंदिर में बधाई देने का मामला हो या फिर उनके साथ सार्वजनिक स्थान पर मंच साझा करने की बात हो अमनमणि हर जगह नजर आये।

फिर नौतनवा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशियों के हराकर अमनमणि क्या सन्देश देना चाहते हैं। ऐसे ही कुछ सवालों का जबाव जब हमने अमनमणि से माँगा तो उनका कहना था कि नौतनवा और सोनौली से भाजपा ने जिन प्रत्याशियों को टिकट दिया था वो दोनों विधानसभा चुनाव और उसके कुछ दिन बाद तक बसपा में रहे, लेकिन टिकट के लिए बीजेपी में आ गए। इन लोगों के जीतने से पार्टी कमजोर होती और खराब मैसेज जाता इसलिए हमने गुड्डू अली और कामना तिवारी को निर्दल चुनाव लड़ाया।

Gorakhpur Final Report से बातचीत में अमनमणि बड़ी बेबाकी से बताते हैं कि सोमवार को मुख्यमंन्त्री गोरखपुर आ रहे हैं और उनसे मिलने का कार्यक्रम तय हो गया है।

अमनमणि ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर हम अपनी बात रखेंगे और यदि उन्होंने आदेश दिया तो वो दोनों निर्दलीय जीते प्रत्याशियों को बीजेपी ज्वाइन करा देंगे।

भविष्य में क्या होता है यह तो नहीं पता लेकिन अमनमणि के बातों से यह अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल नहीं है कि भाजपा को जल्द ही एक और विधायक उत्तर प्रदेश में मिल सकता है। क्यों की जो व्यक्ति खुद अभी पार्टी में नहीं है वो भला दो अन्य को भाजपा ाकिसे ज्वाइन करा सकता है यह प्रश्न विचारणीय तो जरूर है।

अमनमणि से यह पूछने पर की आप पार्टी के खिलाफ ही चुनाव लड़वाए और अब उसी पार्टी में अपने दोनों समर्थकों को ज्वाइन कराने की बात पर अमनमणि कहते हैं कि निकाय चुनाव में देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के परिवार के लोग भी भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़े थे जबकि रामनाथ जी का भाजपा के प्रति योगदान और भाजपा ने उन्हें क्या दिया यह किसी से छुपा नहीं है। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र है और यहाँ इस तरह की बातें होती रहती हैं।

 


GFR Desk2nd December 2017
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कुशीनगर के अनीश सोनी

कुशीनगर: एक बेटा अपनी माँ के असहनीय दर्द को कम करने के लिए गीत गाने लगा क्योंकि उसकी माँ को संगीत से बहुत लगाव था। माँ को गंभीर बीमारी थी इसके कारण उनको असहनीय दर्द होता था तो वह अपने बेटे को बुलाकार संगीत सुनती थी।

बेटा छोटा था उसको भी लगता था कि यह संगीत ही उसकी माँ के दर्द की असली दवा है। जिस संगीत के माध्यम से वह माँ के दर्द को कम करता था आज उसी संगीत के बदौलत वह बेटा पूर्वांचल सहित देश विदेश में अपना और अपने परिवार का नाम रोशन कर रहा है।

हम बात कर रहे हैं अनीश सोनी की। निचलौल के मूल निवासी अनीश ने शिक्षा दीक्षा अपने ननिहाल पडरौना में ग्रहण किया और यहीं से शुरू हुई उसके संगीत का सफर।

आज अनीश सोनी की पहचान अंतरष्ट्रीय भजन गायक के रूप में हो गयी है अनीश के गाये भजनों को पूर्वांचल तो छोड़िए विदेशों में भी लोग सुन रहे हैं। अनीश नेपाल, थाईलैंड, मॉरीशस, रूस, भूटान, अरमोनिया तक पूर्वांचल और कुशीनगर का नाम रोशन कर चुके हैं।

अनीश को थाईलेंड के राजशाही द्वारा और बिरजू महाराज द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। अनीश सारे विधाओं के गाने गाते हैं। 2010 में उनको बेस्ट भजन उत्तर प्रदेश का अवार्ड भी मिल चुका है।

Gorakhpur Final Report से बातचीत में अनीश बताते हैं कि उनकी कोशिश है की समूचे देश में कुशीनगर सहित पूर्वांचल का नाम संगीत की दुनिया में रोशन हो।

उनका कहना था कि पूर्वांचल पिछड़ा तो जरूर है लेकिन प्रतिभा की कमी नहीं है। अनीश बताते हैं कि उन्होंने पूर्वांचल खास कर कुशीनगर की प्रतिभाओं को सामने लाने के लिए इसीलिए उन्होंने ‘कुशीनगर आइडियल’ शुरू किया। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम से बहुत सी प्रतिभाएं निकलकर सामने आ रहे हैं और बहुत आगे की तरफ निकल रहे हैं।

अनीश ने पडरौना में नटराज म्यूज़िक के नाम से एक संस्था भी खोली है। यह एकेडमी संगीत के हर सॉज सज्जा से लैस है और इसमें एकेडमी में गरीब बच्चों के लिए निशुल्क संगीत सिखने की सुविधा है।

अनीश बताते है समाज में बढ़ रहे साइबर अपराध को रोकने के लिए एक वीडियो लांच किया गया जिसकी सराहना तात्कालिक गृह राज्यमंत्री तक ने की थी। अनीश इस समय कुशीनगर आइडियल के पहले सीजन की अपार सफलता के बाद जल्द ही सीजन 2 लांच करने।


GFR Desk1st December 2017
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एड्स दिवस

नीतीश गुप्ता
गोरखपुर:

एड्स दिवस पर एड्स के प्रति जागरूकता कहें या फिर लोगों में इसका ख़ौफ़, जो भी हो लेकिन आजकल गोरखपुर में कंडोम का बिज़नेस खूब जोरो से चल रहा है।

शहर के मेडिकल स्टोर्स से डेली लगभग 6000 कंडोम बिक रहे है। शहर में लोगो की डिमांड को देखते हुए कंपनियों ने भी माल ज्यादा सप्लाई करना शुरू कर दिया है।

गोरखपुर के थोक मार्किट में एक दिन में 20000 से ज्यादा कंडोम बिक रहे है। स्थानीय जानकर बताते हैं कि कंडोम की बिक्री में इजाफा का कारण एड्स मरीजो की संख्या में इजाफा तो है ही वहीँ यौन रोगों के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ना भी एक कारण हो सकता है।

गोरखपुर के भालोटिया मार्किट में पहले एक महीने में लगभग 40 हजार से 50 हजार रुपए की कंडोम की बिक्री थी जो अब बढ़ कर 60 लाख पहुँच गयी।

आपको बताते चले कि हर साल 1 दिसंबर को वर्ल्ड एड्स दिवस मनाया जाता है जिसमे लोगो को एड्स से बचाव के बारे में बताते है ओर एड्स के प्रति लोगों को जागरूक करते है।।2016 में लगभग 10 लाख लोग एड्स की बीमारी से मर गए।

एड्स के प्रारम्भिक लक्ष्ण

वजन का कम हो जाना।
लगातार खांसी आना।
हमेशा जुखाम होना।
बुखार,सिरदर्द,थकान,हैजा
शरीर पर निशान बनना।

कैसा फैलता है एड्स?

1-अगर एक सामान्य व्यक्ति एचआईवी संक्रमित व्यक्ति वीर्य योनि स्त्राव अथवा रक्त के सम्पर्क में आता है तो उसे एड्स हो सकता है।।
2-एड्स पीड़ित के साथ यौन सबन्ध बनाने से।
3- दूषित रक्त से।
4- संक्रमित सुई के उपयोग से।
5-एड्स संक्रमित मां से उसके होने वाले बच्चे में।


GFR Desk29th November 2017
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आयुष द्विवेदी
गोरखपुर: खेलों की बात करें और कुश्ती का जिक्र ना हो तो ऐसा ही होगा जैसे क्रिकेट की बात हो और सचिन तेंदुलकर का उल्लेख ना हो। पूर्वांचल की धरती तो इस मामले में बहुत ही उर्वर रही है।

इस धरती ने बहुत से नामी-गिरामी पहलवानों को जन्म दिया है जिन्होंने आगे चल कर ना केवल अपने गाँव, शहर बल्कि पुरे देश का नाम विश्व पटल पर चर्चित किया।

आज भी कुश्ती की वजह से पूर्वांचल के कई पहलवान नाम और शोहरत कमा रहे हैं। इनमे से कइयों का चयन तो इसी खेल के बदौलत सरकारी नौकरी में हो गया।

आज हम आपका परिचय इस खेल के खिलाडी से कराने जा रहे हैं। मऊ जनपद से 2 किलोमीटर दूर एक गांव है रस्सीपुर। यहीं के सोनू यादव पहलवान है। बचपन में ही पहलवानी का सौख था क्योंकि उनके मामा खुद अंतरष्ट्रीय पहलवान रहे हैं।

सोनू के मामा जनार्दन यादव तीन बार यूपी केशरी रहे है और वर्तमान में वह गोरखपुर रेलवे में कार्यरत हैं। मामा को देखकर सोनू के मन में पहलवानी में कैरियर बनाने की ललक पैदा हुई और इसी ललक और जी तोड़ मेहनत ने सोनू को राष्ट्रीय पहलवान बना दिया।

सोनू बताते हैं कि पहलवानी की शुरुआत गोरखपूर रीजनल स्टेडियम से हुई। आज सोनू कई प्रदेशों से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक में अपने दावं के लिए प्रसिद्द हैं। उनका चयन राष्ट्रीय टीम में भी हो चुका है। सोनू ‘मऊ कुमार’ भी रह चुके हैं।

Gorakhpur Final Report से बात करते हुए सोनू ने बताया कि जो भी बच्चे इसमें कैरियर बनाना चाहते है वह मेहनत करे कामयाबी जरूर मिलेगी। कुश्ती के बदौलत सोनू को खेल कोटे के तहत रेलवे में नौकरी भी मिल गई है ,वर्तमान में वह गोरखपुर रेलवे के कमर्शियल डिपार्टमेंट में कार्यरत हैं।


GFR Desk28th November 2017
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आयुष द्विवेदी
गोरखपुर: अगर इंसान के अंदर कुछ अलग कर गुजरने का जज्बा हो तो पैसा आड़े नहीं आता। ऐसी ही बात को सच कर दिखाया है सिकरीगंज की एक महिला ने।

आज हम बात कर रहे है गोरखपुर से 40 किलोमीटर दूर सिकरीगंज की उस महिला की जिसे अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए गोरखपुर आना पड़ा और उसे तमाम कठिनाईयों का सामना करना पड़ा।

उस महिला का नाम है हेमलता ओझा। हेमलता जब सिकरीगंज छोड़ कर गोरखपुर आयीं तो ना केवल उनके सामने बच्चों को ठीक से पढ़ाने की समस्या थी बल्कि उनका सही से देखभाल करना भी उनके लिए एक कठिन कार्य था।

हेमलता को शुरू में रोजगार खोजने के लिए इधर उधर भटकना पड़ा। इसी बीच उन्हें एक जगह से झूमर बनाने का काम मिला। फिर क्या था हेमलता ने झूमर बना कर दुकानों पर सप्लाई करना शुरू कर दिया।

एक दिन एक दुकानदार ने हेमलता से कहा क्यों नहीं आप कई दुकानों से आर्डर लेकर झूमर बनाती हो जिससे आपकी इनकम भी बढ़ेगी साथ-साथ आप कई अन्य महिलाओं को रोजगार भी दे देंगी।

हेमलता इसके बाद गोरखपुर के तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी पियूष कुमार रंजन के संपर्क में आयी। चुकि काम शुरू करने के लिए उसे पैसे की जरुरत थी। पियूष रंजन की पहल पर हेमलता को शहरी विकास योजना डूडा के तहत 2 लाख रुपये का लोन मिला।

उस दो लाख रुपये से शुरू किया गया वो काम आज इतना बढ़ चूका है कि हेमलता जिन्हे शुरआती दौर में प्रति दिन 150 रुपये भी कमाना मुश्किल था, आज उनके चलते 30 महिलाओं को रोजगार मिला हुआ है।

Gorakhpur Final Report से बातचीत में हेमलता बताती हैं कि आज उनके संस्थान में महिलाएं अपने घरेलू काम काज निपटाने के बाद पार्ट टाइम में झूमर बनाकर उन्हें सेल करती है जिससे उन महिलाओं को महीने में 4000 रुपये तक की कमाई हो जा रही है।

आपको बता दें कि हेमलता गोरखपुर महोत्सव में भी एक स्टाल लगाती हैं। हेमलता को उनके इस अनूठे काम के लिए कई खिताबों से भी नवाजा भी जा चुका है। कुछ दिन पहले उनकी एक किताब कश्मकश का विमोचन भी हुआ। प्रसिद्ध महिला चिकित्सक सुरहिता करीम ने गोरखपुर में एक मुसाइरा भी किया था। हेमलता आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है।

अपने नेक कामों के माध्यम से हेमलता एक लड़की को पॉलिटेक्निक भी करा चुकी हैं। वो लड़की अब आगे की तयारी कर रही है।

हम तो यही कह सकते हैं कि अगर इंसान के अंदर हिम्मत और कुछ कर गुजारने का हौसला हो तो उसके लिए कुछ भी संभव है। हेमलता आज महिलाओ के लिए आदर्श बनती जा रही हैं।

 


GFR Desk28th November 2017
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हरिकेश सिंह
गोरखपुर: जी हां! उसे फिल्मी पर्दे के डान की तरह डायलॉग बोलने, महंगी गाड़ियों में घूमने-फिरने, महंगे होटलों की सेवाएं लेना और मसाज पार्लर और महंगी कॉल गर्ल्स और अत्याधुनिक असलहों का शौक था।

जिसकी एक टेलीफोन काल अच्छे-अच्छे की पतलून गीली करने को काफी थी। लेकिन कहावत है कि बुरे का अंत बुरा ही होता है। साथ ही साथ इस डॉन के अंत के साथ ही यूपी पुलिस की एसटीएफ फोर्स वजूद में आई।

आखिर कौन था,वह। जिसका नाम ही लगभग एक दशक तक यूपी तो यूपी, पड़ोसी राज्यो में भी दहशत फैलाने को काफी था। हालांकि गलत तो गलत ही होता है फिर भी इस माफिया डॉन की जिंदगी को बॉलीवुड के फिल्मकारों ने अभिनेता अरसद वारसी अभिनीत फ़िल्म ” सहर “के माध्यम से सिल्वर स्क्रीन पर दिखाया।

जी हाँ,उस गैंगस्टर को माफिया डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला के नाम से लोग याद करते हैं। जो सीएम सिटी गोरखपुर के बड़हल गंज इलाके के मामखोर गांव का बाशिंदा था।जिसने जिंदगी की सबसे बड़ी नादानी उस समय के चीफ मिनिस्टर की सुपारी लेकर कर दी थी।

बात करते हैं इस माफिया डॉन की,तो मामखोर गांव के सीधे साधे शिक्षक पिता का यह छोटा और दुलारा बेटा बचपन से ही निडर तो था ही साथ ही साथ गांव के अखाड़े की मिट्टी भी उसको खूब भाई थी। नतीजा एक अच्छा कुश्ती का प्लेयर भी था। उसकी रोजमर्रा की जिंदगी में सुबह उठकर अखाड़े में व्यायाम फिर सभी दैनिक कार्यो से निवृत होकर स्कूल जाना था।

किंतु यह सब ज्यादा दिन नही चल सका, उसके शांत जीवन मे अचानक हलचल मच गई, जब उसकी बहन को 1993 में एक दबंग युवक ने छेड़ते हुए सिटी बजा दिया, जिसके प्रतिशोधवश उसने आरोपी राकेश तिवारी को मौत के घाट उतार दिया और देश की धरती छोड़ बैंकॉक के लिए फरार हो गया। यहीं से शुरू हो गयी उसके जरायमपेशा होने की रील लाइफ।

बैंकाक में तमाम रंगीनियां देखने के बाद उसे अपनी निजी जिंदगी में भी संजाने की सोची और चल पड़ा वापस मंजिल की तरफ। जहाँ उसे अपने सपनों को साकार करने के लिए एक सरपरस्त की तलाश थी और वह भी जल्द ही पूरी हो गयी। वह उस समय के बिहार के मोकामा के चर्चित माफिया सूरजभान की छत्रछाया में जरायम को नजदीक से देखने समझने लगा। जहां से धीरे-धीरे वो जरायमपेशा की काली दुनिया में नाम कमाने लगा।

यहीं इसके साथ ही उसके नाम का सिक्का चलने लगा। यूपी से लेकर बिहार,पश्चिम बंगाल और दिल्ली से लेकर नेपाल तक उसके नाम की तूती बोलने लगी। अब पूरी तरह से हत्या, अपहरण, रंगदारी ,ड्रग्स और लॉटरी का बेताज बादशाह बन चुका था।अब उसके नीचे भी एक इशारे पर काम करने वाले कई अपराधी आ चुके थे ।इसी दौरान वर्ष 1997 में उसने अपराध की दुनिया से सियासत में कदम रखने वाले गोरखपुर के ही माफिया डॉन वीरेंद्र शाही को लखनऊ में गोलियों से छलनी कर दिया।

हालांकि इस हत्याकांड में जांच कर रही पुलिस के शक की सुई विधायक हरिशंकर तिवारी की तरफ मुड़ी। लेकिन जब हकीकत पता चला कि हमेशा अपने साथ एके 47 रखने वाला श्रीप्रकाश शुक्ला भी जरायम की दुनिया से राजनीति में जाने को चिल्लुपार से चुनाव लड़ना चाहता था तो पुलिस ने अपना शिकंजा उस पर कसना शुरू कर दिया,लेकिन बड़ी मुसीबत ये कि किसी के पास उसकी शिनाख्त हेतु कोई फोटो नही थी।

इसके बाद जल्द ही श्रीप्रकाश के वहां के विधायक रहे हरिशंकर तिवारी से भी अनबन हो गई। अब उसकी हिट लिस्ट में हरिशंकर तिवारी का भी नाम आ गया था। लेकिन वह किसी तरह सफल नही हो सका। इस दौरान उसने किलिंग और रंगदारी से काफी पैसे कमा लिए थे। लिहाजा उसने काली कमाई के धन को बेतहाशा लुटाने के लिए फिल्मी विलेनों की तरह तमाम महंगे शौक पाल लिए।

इस दौरान वो अपने सरपरस्ती वाली बिहार की भूमि पर भी सक्रिय रहा। उसने बिहार में एक सियासी हत्या की। जिससे हड़कंप मच गया। जून 1998 में पटना में उसने अपने साथियों के साथ बिहार के बाहुबली मंत्री बृज बिहारी प्रसाद को दिनदहाड़े गोलियों से भून डाला। इसके बाद श्रीप्रकाश के नाम से ठेकेदार कांपने लगे। उस इलाके में रेलवे का ठेका बिना उसकी इजाजत के कोई नहीं लेता था। अब अपने कुख्यात होने की वजह से उसको लगने लगा था कि वो जो चाहेगा वही होगा।

लेकिन दुनियादारी से अलग सोच रखने वाले इस माफिया ने महज 25 साल की उम्र में अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती कर दिया। कहा जाता है कि उसने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को मारने के लिए 6 करोड़ की सुपारी ले ली। इसी के साथ उसके रियल और रील लाइफ की दी एन्ड होने वाली स्क्रिप्ट की शुरुआत हो गयी।

हालांकि अपने वारदातों की वजह से वह पहले से ही पुलिस की नजरों में था और अब सीएम की सुपारी ले ली तो स्वाभाविक है कि पुलिस उसके पीछे हाथ धोकर पड़ेगी ही। नतीजा अब पुलिस के सामने एक ही टारगेट था कि किसी भी तरह से इस नाम का अंत हो।

इसके लिए लखनऊ सचिवालय में यूपी के मुख्‍यमंत्री, गृहमंत्री और डीजीपी की एक बैठक कर इस तरह के कुख्यात अपराधियों से निपटने के लिए स्‍पेशल फोर्स बनाने की योजना तैयार हुई। 4 मई 1998 को यूपी पुलिस के तत्‍कालीन एडीजी अजयराज शर्मा ने राज्य पुलिस के बेहतरीन 50 जवानों को छांट कर स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) बनाई। इस फोर्स का पहला टास्क ही श्रीप्रकाश शुक्ला जिंदा या मुर्दा पकड़ना दिया गया।

इस तरह से अब पूरी कमान एसटीएफ के हाथ आ गयी और उसने इस नाम को खत्म करने की रणनीति तैयार कर लिया। खोज होने लगी उसके मिलने जुलने वालों के टेलीफोन नम्बर्स की,चूंकि उस समय सर्विलांस की सेवाएं भी आसान न थी। वाबजूद इसके श्रीप्रकाश के नजदीकी सभी संदिग्धों के नम्बर को सर्विलांस पर लगाया गया।

इस दौरान पुलिस की श्रीप्रकाश शुक्ला से पहली मुठभेड़ 9 सितंबर 1997 को लखनऊ में हुई। पुलिस को अपने एक मुखबीर से यह सूचना मिली थी कि शुक्ला अपने कुछ दोस्तों के साथ एक हेयर सैलून में बाल कटवाने जा रहा है। इस मुठभेड़ में पुलिस को कामयाबी नहीं मिली।बल्कि इस मुठभेड़ में पुलिस का एक जवान शहीद हो गया।

सर्विलांस पर अपनो के नम्बर्स लगने की भनक से श्रीप्रकाश को शक हो गया। अपनी दिल्ली की एक गर्लफ्रेंड से बात करने के लिए उसने मोबाइल की जगह पीसीओ का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। लेकिन पुलिस ने उसकी गर्लफ्रेंड के नंबर को भी सर्विलांस पर लगा रखा था और यह बात श्रीप्रकाश शुक्ला को नहीं पता थी।

एक दिन सर्विलांस से पता चला कि हाल ही में जिस पीसीओ से श्रीप्रकाश कॉल कर रहा है वो गाजियाबाद के इंदिरापुरम इलाके में स्थित है,इस सूचना पर एसटीएफ की टीम तुरंत हरकत में आई और एक टीम फौरन दिल्ली के लिए रवाना हो गई। 23 सितंबर 1998 को टीम के प्रभारी अरुण कुमार को खबर मिली कि श्रीप्रकाश दिल्ली से गाजियाबाद की तरफ आ रहा है। श्रीप्रकाश की कार ने जैसे ही वसुंधरा इन्क्लेव पार की, अरुण कुमार सहित टीम उसके पीछे लग गई। उसकी कार जैसे ही इंदिरापुरम के सुनसान इलाके में दाखिल हुई, मौका मिलते ही एसटीएफ की टीम ने श्रीप्रकाश की कार को ओवरटेक कर उसकी कार को रोक लिया।

पुलिस ने पहले श्रीप्रकाश को सरेंडर करने को कहा, लेकिन वह नहीं माना और फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस की जवाबी फायरिंग में श्रीप्रकाश मारा गया।पुलिस रिकार्ड के मुताबिक श्रीप्रकाश के खात्मे के लिए पुलिस ने जो अभियान ऑपरेशन बाजूका चलाया।उस पर काफी रुपये खर्च हुए थे।यह अपने आप में इस तरह का पहला मामला था। जब पुलिस ने किसी अपराधी को पकड़ने के लिए इतनी बड़ी रकम खर्च की थी।

श्रीप्रकाश शुक्ला की मौत के बाद एसटीएफ को जांच में कई नेताओं और पुलिस के आला अधिकारियों से सम्बन्धों की मालूमात हुई थी। जो उसके लिए खबरी का काम करते थे।जिसके बदले उन्हें पैसा मिलता था। उस दौरान एक मंत्री (अब जेल में बंद हैं) का नाम तो उसके साथ कई बार जोड़ा गया था।


GFR Desk25th November 2017
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GFR REALITY CHECK

संदीप त्रिपाठी
गोरखपुर: असहाय, गरीबों, बेसहारा लोगों और मजलूमों को कड़कती ठण्ड से बचाने के लिए सरकार रैनबसेरों का निर्माण करवाती है। ऐसा नहीं है कि इन रैनबसेरों में भी व्यवस्था कोई बहुत अच्छी होती है लेकिन इतना तो हो ही जाता है कि गरीब ठण्ड से अपना बचाव कर ले।

लेकिन उस पर भी जब ठण्ड आने के बाद इन रैनबसेरों के जब ताले ही न खुले तो आखिर गरीब कहाँ जाये और क्या करे! आपको बता दें कि महानगर में ठंड अब धीरे धीरे उफान पर है उसके बाद भी अभी तक किसी भी रैनबसेरा के ताले नही खुले हैं।

नगर निगम के गैर जिम्मेदार कर्मचारी सरकार की योजनाओं को पलीता लगाने में लगे हुए हैं। आलम यह है कि रैन बसेरे बंद पड़े हैं और सर्दी में गरीबों को सड़क पर ठिठुरना पड़ रहा है।

रात में बेसहारों को सहारा देने के लिए बनाए गए इन रैनबसेरों को हाल जानने के लिए जब Gorakhpur Final Report के रिपोर्टर निकले तब उन्होंने पाया कि चार में से केवल एक रैनबसेरा खुला मिला।

वहीँ जब हमारी टीम कचहरी बस स्टैंड पर पंहुची तो यहाँ के रैनबसेरे के मेन गेट पर ताला लटका हुआ मिला। आसपास के लोगों से पूछने पर पता चला कि यहां यूं ही ताला लटका रहता है। जिसे भी सोना होता है, वह आसपास ठिकाना ढूंढते हैं। यहां पर तैनात किए गए कर्मचारी का भी कोई अता-पता नहीं था।

जब यह संवाददाता रेलवे स्टेशन स्थित रैन बसेरा पहुंचा तो यहाँ आस-पास बड़ी तादाद में लोग छत की तलाश घूमते नजर आए, लेकिन सहारा देने वाला कोई नहीं मिला। जब आसपास के लोगों से बात की गई तो उनका कहना है कि कई बंद रैन बसेरा में नशेड़ी किस्म के भी लोग गेट छलांग लगाकर दाखिल हो जाते हैं। मगर उन्हें बोलने वाला कोई नहीं है।

धर्मशाला बाजार स्थित रैन बसेरा खुला मिला। यहां तीन लोग सो रहे थे। जब उनसे बातचीत की गई तो उनका कहना था कि यहां पर कोई प्रबंध नहीं है। गद्दा और कंबल से दुर्गध उठती है। जिसके चलते यह ओढ़ने लायक नहीं हैं। जो भी अपने साथ रहता है उसी से काम चलाया जाता है। रात में ज्यादा ठंड पड़ती है तो मजबूरी में कंबल का इस्तेमाल किया जाता है।

शिवपुर शहबाजगंज में नगर निगम की ओर से अस्थाई रैन बसेरा बनाया गया है। मगर यहां की हालत भी वही है। लोगों को राहत देते के बजाए यहां भी ताला लटका हुआ मिला। आसपास के लोगों का कहना है कि यहां भी हमेशा ही ताला लटका रहता है, जिससे लोगों को रात गुजारने के लिए ठिकाना तलाश करना पड़ता है।

महानगर के स्थाई रैनबसेरों की लिस्ट
– कचहरी बस स्टेशन
– टीपी नगर
– रेलवे स्टेशन
– मेडिकल कॉलेज
– गोरखनाथ झूलेलाल मंदिर
– मोहरी पंचायत भवन
– धर्मशाला बाजार

अस्थाई रैन बसेरा
– रोडवेज बस स्टेशन
– शिवपुर सहबाजगंज
– हांसूपुर

 


GFR Desk25th November 2017
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में रोगी मित्र कर रहे इंसेफेलाइटिस मरीजो का इलाज

नीतीश गुप्ता
गोरखपुर: इंसेफेलाइटिस। यह नाम सुनते ही लोगों के सामने मौत का मंजर दिखने लगता है। पूर्वांचल में इंसेफेलाइटिस तो एक तरह से मौत का दूसरा नाम ही है। इस बीमारी से यहाँ के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एक दो बच्चे लगभग रोज ही काल के गाल में समा जाते हैं।

अगस्त में बच्चों की मौत पर हुआ बवाल और सियासी उठापटक अभी तक लोगों के जेहन में है। कई बार ऐसा होता है कि हम केवल नकारात्मक बातों पर ही ज्यादा फोकस करते हैं और इसी क्रम में कई अच्छे पहलु अनछुए रह जाते हैं।

Gorakhpur Final Report की टीम जब इन्ही अनछुए पहलुओं को सहेजने जब बीआरडी मेडिकल कॉलेज पंहुची तो ऐसी बात सामने आयी जो किसी के लिए एक नजीर बन सकती है। ऐसे ही एक व्यक्ति हैं डॉ विजय श्रीवास्तव और उनके साथ रोगियों की सेवा में जुटी हुई 9 वालंटियर जिन्हें रोगीमित्र के नाम से जाना जाता है की टीम।

डॉक्टर श्रीवास्तव बताते है कि वो इंसेफेलाइटिस वार्ड में भर्ती बीमार बच्चों एवं उनके परिजनों का वर्ष 2014 से मदद कर रहे हैं। उन्होंने बताया की कुछ डिस्ट्रिक्ट जज की मदद से उन्होंने यह काम करना शुरु किया।

आपको बताते चलें कि डॉक्टर श्रीवास्तव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रभारी हैं और इनके साथ 9 वालंटियर जिन्हें रोगीमित्र के नाम से जाना जाता है, लोगों की सहायता करने में दिन रात लगे रहते हैं। ये वालंटियर हर तरीके से अस्पताल में आ रहे मरीजों की मदद करते हैं चाहे वह खून देना हो या फिर लोगों के लिए पर्ची बनवाना हो यह वालंटियर 24 घंटे निस्वार्थ भाव से मरीजों की सहायता करते रहते हैं।

डॉ श्रीवास्तव “पहल अन्नागिरी” नाम से एक सेवा चलाते है जो कि मरीजो के परिजनों को भोजन खिलाते है बिना पैसे लिए। डॉ श्रीवास्तव चाहते है कि शहर के और भी लोग निस्वार्थ भाव से वहां अन्न दान करे ताकि वहां आ रहे ज्यादे से ज्यादे मरीज और उनके परिजनों को मुफ्त भोजन उपलब्ध करा सके।

2014 से 2017 अब तक डॉ श्रीवास्तव और उनके वोलेंटियर्स 7000 से ज्यादा मरीजो की मदद कर चुके हैं। अगर आप भी डॉ श्रीवास्तव के साथ मिल कर निस्वार्थ भाव से मरीजो की मदद करना चाहते हैं तो आप इस नंबर पर सम्पर्क कर सकते है-9415378716


GFR Desk22nd November 2017
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गोरखपुर: प्रदेश में आज हो रहे पहले चरण में 24 जिलों के 230 स्थानीय निकायों के 4095 वार्डों के लिए मतदान हो रहा है और 3731 मतदान केंद्रों के 11,683 मतदान बूथ पर 1.09 करोड़ मतदाता वोट देंगे। इसी क्रम में सीएम सिटी गोरखपुर में नगर निकाय का चुनाव सुबह से ही शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हो गया है। शहर भर के दर्जनभर बूथों पर ईवीएम खराबी की वजह से घंटो मतदान देरी से शुरु हुआ।

तश्वीरों में देखिये गोरखपुर में मतदान

गोला नगर पंचायत चुनाव में मतदान करने आये 105 वर्षीय सुलेमान जो दोनों आँखों से दिव्यांग है 

केंद्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ल ने किया मतदान 

 डॉ वाई डी सिंह अपने परिवार संग पहुचे मतदान केंद्र

कांग्रेस नेता सैयद जमाल अहमद