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GFR DeskMay 17, 2017
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सिद्धार्थनगर (अर्चिष्मान मिश्र): भारत-नेपाल सीमा से सटे सिद्धार्थनगर जिला में साइबर हमले का खतरा है, जिससे लोगों में मंगलवार को साइबर हमले का खौफ रहा। साइबर हमले को लेकर अचानक विभागों के कम्प्यूटर व इंटरनेट को बन्द करने का आदेश जारी कर दिया गया। जिससे कि किसी भी विभाग का सिस्टम साइबर हमले का शिकार न हो जाय। इस बीच एनआईसी ने भी एडवाइजरी जारी कर सभी को साइबर हमले से सतर्क रहने को कहा है। इसके लिए एनआईसी के पहले पेज पर बकायदा बचाव के उपायों के बारे में भी जानकारी दी गई है।

बता दें कि रैंसमवेयर वायरस अटैक की साजिश से पूरा विश्व जूझ रहा है। अभी तक साइबर हमला नहीं थमने से हर तरफ इसका खौफ देखा जा रहा है। सोमवार को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैँकों को एडवाइजरी जारी करने के बाद यह खतरा और भी बढ़ गया। देखते ही देखते सभी सतर्क हो गए। कई कम्पनियांें के लोगों ने इंटरनेट के इस्तेमाल पर पाबन्दी लगा रखी है, जिससे कि वह साइबर हमले का शिकार न हो।

इस बीच मंगलवार को अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को व्हाट्सएप के माध्यम से अपने-अपने कार्यालयों इंटरनेट कनेक्शन बंद करने और इंटरनेट के साथ कम्प्यूटर पर काम न करने का निर्देश दिया गया। इस निर्देश के आने के बाद देखते ही देखते सभी विभागों के कम्प्यूटर बन्द करा दिए गए। इस बीच जिला सूचना विज्ञान केन्द्र की ओर से जब निर्देश जारी किया गया तो कार्यालय पर विभिन्न विभाग के लोगों की जुटान शुरू हो गई।

इसके बाद एनआईसी ने लोगों की सुविधा के लिए सिद्धार्थनगर एनआईसी के मुख्य पेज पर साइबर हमले से बचाव की एडवाइजरी जारी कर सभी को इससे बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी। एनआईसी द्वारा साइबर हमले से बचाव के उपाय की जानकारी दिए जाने के साथ ही दोपहर दो बजे के बाद कई विभागीय कार्यालयों के कम्प्यूटर खुले और काम शुरू हुआ। इस बीच कई विभागीय कार्यालयों में ऑनलाइन व इंटरनेट के माध्यम से होने का कामकाज पूरी तरह से ठप रहा, जिससे लोगों को परेशानी उठानी पड़ी।

खतरनाक है एक्सपायर विंडों का इस्तेमाल

जिला सूचना विज्ञान केन्द्र अधिकारी नसीम अहमद की माने तो साइबर हमले का शिकार एक्सपी विंडों सिस्टम का प्रयोग करने वाले कम्प्यूटर पहले होंगे। क्योंकि माइक्रोसॉफ्ट से विंडो एक्सपी को बन्द कर दिया है और इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी कम्पनी नहीं दे रही है। ऐसे में जहां पर अभी भी विंडो एक्सपी का इस्तेमाल हो रहा है, वहां पर उसे फारमेट कर विंडो, सात, आठ और दस को अपडेट कर काम किया जा सकता है। साथ ही सभी प्रकार के ब्राउजर को अपडेट करने की जरूरत है जिससे कि साइबर हमले का शिकार होने से बचा सकता है।

यह उपाय कर बचा सकतें है अपना कम्प्यूटर सिस्टम

साइबर हमले से बचाव के लिए पूर्व में की गई तैयारियां काम आ सकती है। थोडी की सावधानी अपनाकर अपने सिस्टम को साइबर हमले का शिकार होने से बचाया जा सकता है। इसके लिए अपडेटिंग सिस्टम को लागू करना होगा, जिससे कि समय-समय पर सिस्टम आॅटोमेटिक अपडेट होता रहे। जिनका सिस्टम अपडेट नहीं है वह उसे अपडेट कर साइबर हमले का शिकार होने से बचा सकतें हैं। इसके अलावा सिस्टम में विंडो सात, आठ व दस का इस्तेमाल फायदेमंद होगा। इमेल व जीमेल ब्राउजर को भी अपडेट करना होगा, सिस्टम में अच्छी कम्पनी का एन्टी वायरस का इस्मेमाल करना होगा। मुफ्त से एन्टीवायरस के प्रयोग से बचना चाहिए।

न छुएं हाइपर व साइबर लिंक

अगर आप के मेल पर किसी भी प्रकार का नया हाइपर व साइबर लिंक आता है उसे गलती से भी न छुएं ऐसा करना कम्प्यूटर सिस्टम के लिए भारी पड़ सकता है। अक्सर मेल, फेसबुक या अन्य सोशल साइटों पर इस प्रकार के साइबर लिंक आते है, जिसे न चाहते हुए भी लोग क्लिक कर देते है। इस दौरान ऐसा करना भारी पड़ सकता है। ऐस में किसी भी प्रकार के फालतू लिंक को न छुए इससे सिस्टम को साइबर हमले का शिकार होने से बचाया जा सकता है।

जिला सूचना विज्ञान विभाग अधिकारी द्वारा जारी किया गया दिशा निर्देश

विभागों में साइबर हमले की खबर पर अलर्ट जारी करते हुए सभी इसके बारे में जानकारी दी गई। इसके लिए एनआईसी के मुख्य पेज पर इससे बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। कई विभाग के लोगों कार्यालय में बुलाकर उन्हें इसके लिए प्रशिक्षित भी किया गया। जिससे कि विभागीय कम्प्यूटर आदि को साइबर हमले से बचाया जा सके। इसके लिए कार्यालयों का भी भ्रमण किया गया। विभागाध्यक्षों को इसके बारे में जानकारी दी गई।

नसीम अहमद
जिला सूचना विज्ञान अधिकारी, सिद्धार्थनगर


GFR DeskMay 17, 2017
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सिद्धार्थनगर: शहर की जलभराव समस्या से निजात दिलाने के लिए पालिका अभी तक ठोस कदम नहीं उठा पाई है। जल निकासी की बदइंतजामी शहर में परेशानी का सबब बनी हुई है। जलभराव की समस्या पर नजर दौड़ाएं तो आम और खास की खाईं पट गई है।

नगर पालिका अध्यक्ष के आवास जैसे इलाके हल्की बारिश से जलमग्न हो गए हैं। जिससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कहीं पर नाले नहीं तो जहां पर नाले हैं वहां पर नाला सफाई के मुकम्मल इंतजाम करने में पालिका पूरी तरह से फेल नजर आ रही है। एक करोड़ की नाला सफाई भी शहरियों को राहत नहीं दिला पा रही है।

शहर के सिद्धार्थ शिक्षा निकेतन इंटर कालेज के पास बनी पुलिया सफाई के बाद जिस तरह से सिल्ट से पटी पड़ी है उससे गंदे पानी का बह पाना मुश्किल हो रहा है। कमोवेश यही हाल पूरे नगर पालिका का है। सिल्ट भरी होने से पीछे का पानी नहीं बह पा रहा है। रामनगर के नाले की विधिवत सफाई न कराने का वहां के निवासी विरोध दर्ज करा रहे हैं।

सिविल लाइन, इंदिरा नगर, शिवपुरी कॉलोनी, आजाद नगर की नालियां उफना रही हैं। खास बात यह कि नालों की सफाई में पालिका ने लाखों रुपए व्यय कर दिए हैं। अधिशासी अधिकारी नगर पालिका राजीव रंजन सिंह ने कहाकि शहर में जलभराव न हो इसके लिए प्रभावी कदम उठाते हुए नाला सफाई कराई गई है। जहां पर दिक्कत आ रही है वहां पर टीम भेजकर सिल्ट और अवरोध हटाए जा रहे हैं।

जबकि हकीकत यह है कि सिर्फ कागजो मे नपा का सारा काम चल चल रहा है धरातल पर शून्य है।बरसात भर सफाई विभाग को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन फिर भी हालात जस के तस बने हुए है जलभराव से निजात दिलाने के लिए शहर में नाला निर्माण भी कराए जा रहे हैं। जिसका उद्देश्य जल नही धन निकासी है।


GFR DeskMay 16, 2017
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सिद्धार्थनगर: सड़क जाम की समस्या नौगढ़ के लोगों की नियती बन गयी है। शायद ही कोई दिन ऐसा हो जब यहां के लोगो को जाम से जूझना न पड़ता हो. आए दिन शहर से होकर गुजरने वाले मार्गो पर भिन्न-भिन्न स्थानों पर जाम से गाड़ियों की लम्बी कतार लग जाती है. जाम की समस्या के बाबत स्थानीय लोगो का कहना है कि वैकल्पिक सड़क व्यवस्था न होने से शहर से होकर ही बड़े और भारी वाहनों को गुजरना पड़ता है।

जिससे आए दिन शहर में पर जाम की स्थिति भयावह हो जाती है. जाम के कारण स्कूली बच्चों की गाड़ियाँ भी घंटों फंसी रहती है. जिससे बच्चों को भूखे प्यासे गाड़ियों में ही कैद रहना पडता है. वही अभिभावकों तथा स्कूल के शिक्षकों का आरोप है कि यदि प्रशासन स्कूलों की छुट्टी के समय यातायात व्यवस्था को नियंत्रण करने का प्रयास करे तो बच्चों को इस समस्या से निजात दिलाया जा सकता है।

मंगलवार को शहर में साप्ताहिक बाज़ार लगने की वजह से अपेक्षाकृत ज़्यादा भीड़ भी रहती है। जिसकी वजह से यह जाम घंटो बना रहता है मानो शहर थम सा गया हो। बच्चों से भरे स्कूलों के कई बस भी इसी जाम में फँसे रहते हैं। ऐमबुलेंस और सरकारी बसों का भी वही हाल है।

वही दूसरी तरफ प्रशासन का कहना है कि सड़क पर चलने वाले छोटे-छोटे वाहनों के चालकों द्वारा यातायात नियमों का पालन न किया जाना ही इस समस्या का मूलकारण है. प्रशासन अक्सर सड़क अतिक्रमण को हटाने के लिए अभियान छेड़ती है।

परन्तु फुटपाथी दुकानदारों द्वारा फिर से सड़क किनारे दुकाने लगा ली जाती है. जिससे भी सड़क जाम की समस्या का सामना करना पडता है. प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि यदि आम जनता सहयोग करे तो यातायात की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

डिवाइडर की भी माँग समय-समय पर तेज़ी से उठती रहती हैं। नगर पालिका ने धन निकासी हेतु डिवाइडर बनवाया लेकिन सड़क चौड़ीकरण नही करवाया सड़क बहुत कम चौड़ी पहले से थी अब डिवाइडर बन जाने के कारण बड़ी गाड़ियों का आवागमन जैसे ही होता है आगे पीछे जाम जैसी परिस्थिति बनी रहती है।


GFR DeskMay 16, 2017
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सिद्धार्थनगर: जिले की नगर पालिका सिद्धार्थनगर के वार्ड नंबर 1 कृष्णा नगर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वच्छ भारत’ मिशन का जमकर मजाक उड़ाया जा रहा है।

यहां वार्ड में नालियों का रखरखाव और गंदे पानी की निकासी नहीं होने से नालियां बदबू मारती हैं। इस गंदगी और बदबू से इलाके में बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है। यहां तमाम सुअर गंदगी मे आकर विचरण करते हैं जिससे इंसेफलाइटिस जैसी भयंकर बीमारी का खतरा रहता है।

नालियों की सफाई नहीं होने से यहां मच्छर और मक्खियां पैदा हो गईं हैं. इससे स्थानीय लोगों का घरों से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है। इतना ही नहीं गंदे पानी की निकासी के लिए कोई प्रबंध नहीं हाेने से नालियों का गंदा पानी सड़क पर बहता रहता है. इससे सड़कों पर पैदल चलना भी दूभर हो गया है।

स्थानीय महिला शिवानी और किरण का कहना है कि छोटे बच्चों को खेलने में परेशानी होती है. यहां कई महीने से साफ-सफाई का कार्य नहीं हुआ है। कभी सफाई कर्मचारी आते हैं तो सिर्फ खानापूर्ति कर वापस चले जाते हैं. थोड़ा बह़ुत जो कचरा इकट्ठा करते हैं, उसे भी यहीं पर जलाकर छोड़ देते हैं।

ठेके पर रखे गए सफाई कर्मचारियों का चार लाख रूपया हर महीने नगर पालिका का खर्च हो रहा है लेकिन धरातल पर कोई कार्य होता नही दिख रहा है। बताते चले कि इस कचड़े के ढेर से महज 200 मीटर दूरी पर नगर पालिका अध्यक्ष का मकान है और उनपर भ्रष्टाचार एवं पद के दुरूपयोग तथा चहेतो को सरकारी खजाने से आर्थिक लाभ पहुंचाने के आरोप हैं। अभी हाल ही मे कमीशनखोरी का उनका एक आडियो भी वायरल हुआ है।

वहीं, स्थानीय सभासद फूलमती ने कहा कि कई बार सदन में इस मुद्दे को उठाया गया, कई बार लिखित शिकायत भी दी गई, लेकिन नगर पालिका प्रशासन लोगों की समस्या की अनदेखी कर देता है. वह कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।


GFR DeskMay 16, 2017
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सिद्धार्थनगर: नगर निकाय चुनाव के लिए अधिकारियों में जिम्मेदारी का निर्धारण कर दिया गया है। मुख्य विकास अधिकारी को मतदान अधिकारी कार्मिक की जिम्मेदारी देने के साथ ही 14 अफसरों को निर्वाचन कार्य के लिए लगाया गया है। सभी अधिकारियों को अपने दायित्वों का निर्वहन समय से पूरा करने का निर्देश जिलाधिकारी कुणाल सिल्कू ने दी है।

नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना अभी भले ही नहीं जारी हुई लेकिन जिला प्रशासन ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। जिसके तहत अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंप दी गई है। जिससे कि समय से नगरीय निकाय चुनाव की सभी तैयारियां पूरी की जा सके। इसके लिए जिलाधिकारी से सभी को जिम्मेदारीं सौंपने के साथ ही अपने दायित्वों का निर्वहन शुरू करने को कहा है। जिससे कि समय से सभी कार्यों को पूरा किया जा सके और चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी न उठानी पडे़।

मतदान कार्मिक, जोनल व सेक्टर मजिस्टे्रटों की तैनाती की जिम्मेदारी सीडीओ को सौपने के साथ ही सहायक प्रभारी अधिकारी के रूप में जिला अर्थ एवं संख्य अधिकारी, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी व सहायक निदेशक बचत को लगाया गया है। इसी तरह से परिवहन, ईधन, सभी प्रकार के वाहनों के इंतजाम की जिम्मेदारी उप सम्भागीय परिवहन अधिकारी तथा सहायक अधिकारी के रूप में डीआरडीए के सहायक अभियन्ता वेद प्रकाश को लगाया गया है। निर्वाचन सम्बंधी सामग्री तैयारी करने की जिम्मेदारी उप निदेशक कृषि व सहायक अधिकारी के रूप में जिला कृषि अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

मतपत्र व्यवस्था सम्बंधी कार्य बन्दोबस्त अधिकारी चकबन्दी को सौंपा गया है। आरओ, एआरओ, जोनल मजिस्ट्रेट, सेक्टर मजिस्टे्रट, मतदान एवं मतगणना कार्मिकों का प्रशिक्षण की जिम्मेदारी मुख्य विकास अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, डीआरडीए के परियोजना निदेशक, राज्य निर्वाचन से तैनात किए जाने वाले प्रेक्षकों की सम्पूर्ण व्यवस्था के लिए सहायक महानिरीक्षक निबंधक व जिला आबकारी अधिकारी, वीडियोग्राफी के व्यवस्था की जिम्मेदारी उपायुक्त मनरेगा, मतगणना पूर्वाभ्यास, बैरीकेटिंग आदि कार्य की जिम्मेदारी अधिशासी अभियन्ता लोक निर्माण विभाग व अवर अभियन्ता विनियमित क्षेत्र को लगाया गया है।

सभी नगर निकायों की मतदाता सूची, मतदान स्थलों के निर्माण, मतदान की व्यवस्था, स्ट्राग रूम, की तैयारी सम्बंधी सारे कार्यों को सभी सम्बंधित उपजिलाधिकारियों को सौँपा गया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सम्बंधी व्यवस्था की जिम्मेदारी मुख्य चिकित्साधिकारी, कन्ट्रोल रूम, निर्वाचन सम्बंधी शिकायतों के निस्तारण व निर्वाचन सम्बंधी सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, सहायक अधिकारी के रूप में प्रशासनिक अधिकारी कलेक्टे्रट व प्रशासनिक अधिकारी विकास भवन को जिम्मेदारी दी गई है।

मतदान टोलियों के वाहन की व्यवस्था, स्थलों तक पहुंचने का रूट चार्ट तैयार करने की जिम्मेदारी जिला विकास अधिकारी व सभी नगर पंचायत व नगर पालिका के अधिशासी अधिकारियों को सौंपी गई है। सूचना एवं जनसम्पर्क व मीडिया के कार्यों की जिम्मेदारी जिला सूचना अधिकारी व सहायक जिला सूचना अधिकारी को सौंपा गया है। डीएम ने कहा कि किसी भी प्रकार के व्यवस्था की विस्तृत जानकारी सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है।


GFR DeskMay 16, 2017
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सिद्धार्थ नगर: बांसी कोतवाली व पथरा थाना में मिट्टी खनन माफियाओ का हौसला बुलन्द है। खनन कार्य रात को 9 बजे से सुबह 6 बजे तक जेसीबी द्वारा हो रहा है। जानकारी के अनुसार मिट्टी का खनन जगह बदल-बदल कर बदस्तूर जारी है।

यह खनन ज्यदातर भट्ठों पर हो रहा है। हैरानी इस बात की है की सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदार मौन हैं।

इसके बाद जिस किसी को अपने घरेलू कार्य के लिए मिट्टी की जरूरत है उनके आगे जिम्मेदार नियम व कानून का हावला देकर बाधित कर देते है ।


GFR DeskMay 16, 2017
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सिद्धार्थनगर: पिछले छह दिनों से लेखपालों के धरने के बाद भी उनकी मांगों को पूरा नहीं कर पाने व एक साथ 117 लेखपालों का ट्रांसफर कर दिए जाने को लेकर राज्य कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारी खासे नाराज हैं।

राज्य कर्मचारी महांसघ के पदाधिकारियों की सोमवार को हुई बैठक में निर्णय लिया किया गया कि अगर लेखपालों की मांगों को पूरा नहीं किया जाता है कि महासंघ भी लेखपालों के समर्थन में आन्दोलन की शुरूआत करेगा।

महासंघ के जिलाध्यक्ष जय गोविन्द यादव की अध्यक्षता में पदाधिकारियों की हुई की बैठक में कार्यवाहक अध्यक्ष रणवीर सिंह ने बताया कि सदर तहसील में 240 लेखपाल तैनात हैं, जिसमें से शासन की मंशा के विपरीत जिलाधिकारी द्वारा 117 लेखपालों का ट्रांसफर इधर से उधर कर दिया गया। इसे लेकर लेखपालों में रोष है।

उन्होंने बताया कि शासन की मंशा है कि 20 फीसदी लोगों का ही ट्रांसफर किया जाय, वह भी उनका जो दस वर्ष से एक ही स्थान पर जमे हैं। जबकि डीएम द्वारा ऐसे भी लेखपालों का ट्रांसफर किया गया जो अभी तक एक तहसील में दस वर्ष पूरा भी नहीं कर सकें हैं। साथ ही दिव्यांग कर्मचारियों का भी स्थानान्तरण प्रशासन द्वारा मनमाने तरीके से किया गया है, जिसको लेकर कर्मचारियों का नाराज होना जायज है।

पदाधिकारियों ने मांग की है कि अगर प्रशासन लेखपालों की जायज मांगों को जल्द पूरा नहीं करता है तो आने वाले दिनों में राज्य कर्मचारी महासंघ लेखपालों के समर्थन में आन्दोलन की शुरूआत करेगा। इस दौरान राकेश सिंह, सुरेश, सीताराम, दीपक श्रीवास्तव, महेन्द्र मिश्रा, गोविन्द पाण्डेय, राघवेन्द्र, सुभाष त्रिपाठी आदि पदाधिकारी मौजूद रहे।


GFR DeskMay 16, 2017
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सिद्धार्थनगर: जिला मुख्यालय के अशोक मार्ग स्थित बिजली विभाग के कार्यालय पर SDO साहब आज सुबह से अपने चैम्बर में नही हैं मौजूद। नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि साहब अक्सर नही रहते हैं। काफी कार्य लंबित पड़े हैं जिसकी वजह से लोगो को समस्याओ का भी सामना करना पड़ता है।

बताते चलें कि मुख्यमंत्री का सख्त आदेश है कि सभी कर्मचारी और अधिकारी समय से अपने अपने कार्यलय पर पंहुचे। लेकिन किस तरह से सीएम के आदेशों की धज्जी उड़ाई जा है यह घटना उसका एक उदहारण है। SDO साहब के गायब होने से परेशानी आम जनता को हो रही है।

वहां मौजूद आशीष तिवारी, इमरान खान आदि ने SDO के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही करने की मांग की।


GFR DeskMay 15, 2017
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सिद्वार्थनगर: समाजवादी अध्ययन केंद्र के संस्थापक और यश भारती सम्मानित मणेंद्र मिश्रा मशाल को इलाहाबाद के नैनी स्थित आर प्रसाद एकेडमी इंटर कॉलेज में सम्मानित किया गया। विद्यालय के वार्षिक आयोजन में मुख्य अतिथि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह एवं विद्यालय के प्रबंधक अनिल पांडेय ने श्री मिश्र को प्रतीक चिन्ह, अभिनंदन पत्र और अंग वस्त्र से सम्मानित किया।

राज्यसभा सांसद रेवती रमन ने अपने भाषण में कहा कि मणेंद्र मिश्रा ने इतने कम उम्र में जिस प्रकार समाजवादी विचारधारा को अपने लेखन से मजबूत किया है वह दुर्लभ है। दिल्ली में मेरे साथी रहे बृजभूषण तिवारी के साथ मेरी इनसे मुलाकात होती रहती थी।तिवारी जी के संसदीय मामलों में लिखने पढ़ने की जिम्मेदारी मणेंद्र मिश्रा को ही थी। इनको सम्मानित करना स्वागतयोग्य है। नौजवानों को अपने कैरियर के साथ समाज के लिए भी इन्ही की तरह अपना योगदान देना चाहिए।

कार्यक्रम के आयोजक और विद्यालय के प्रबंधक अनिल पांडेय ने मणेंद्र मिश्रा के प्रति आभार प्रकट करते हुए इलाहाबाद से उनके गहरे जुड़ाव के विषय मे विस्तार से बताया।इलाहाबाद विश्वविद्यालय सहित छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र,मोहन सिंह सहित प्रयाग के साहित्यिक सम्पर्को के पुराने संस्मरण को याद दिलाया।

कार्यक्रम में बीएचयू के एसिस्टेंट प्रोफेसर धीरेंद्र राय, शक्ति सौरभ,प्रभात पांडेय,पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष समीर पांडेय सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।


GFR DeskMay 15, 2017
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सिद्धार्थनगर: नवोन्मेष का अर्थ है नया उत्थान, नया विकास। सिद्धार्थनगर में एक बहुचर्चित सामाजिक और सांस्कृतिक संस्था है जिसका नाम है नवोन्मेष। समय समय पर नवोन्मेष के द्वारा जागरूकता अभियान के लिए नुक्कड़ नाटक और रचनात्मक नाट्योत्सव समारोह का आयोजन किया जाता है। इसके नाटकों में साहित्य और मनोरंजन की जबरदस्त चाश्नी देखने को मिलती है। नवोन्मेष के कार्यकर्ताओ की काबिलियत का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि अक्सर नाट्योत्सव देखते देखते दर्शको की आंखे भी नम हो जाती हैं।

बताते चलें कि अभी हाल ही में नवोन्मेष के द्वारा एक नाट्य प्रस्तुत किया गया ‘बुद्धम् शरणम् गच्छामि’ जो विवादो के घेरे में आ गया है। एक पत्रकार ने आरोप लगाते हुए लिखा है कि नवचश्मेष ने भगवान गौतम बुद्ध का अपमान किया है (संस्था ने मंचन कर कर दिखाया की पुरे संसार मे न जा कर जब गौतम बुद्ध अपने जन्म स्थली सिद्धार्थ नगर आने को तैयार हुए तो उनके शिष्यो ने उन्हे रोका लेकिन वह नही माने और अपने शिष्यो के साथ कपिलवस्तु चले आये जहां पानी मांगने पर अलीगढवा जो सिद्धार्थ नगर कपिलवस्तु का एक कस्बा है वहां के दुकानदार ने उन्हे लाठी ड़डे से पिटने के लिए हाथ उपर किये तथा बहुत ही बुरा भला कहा साथ ही पानी के बदले कस्बे के सभी दुकानो को भगवान गौतम बुद्ध द्धारा साफ करवाया गया उनके साथ पशुओ से भी अमानवीय व्यवहार किया गया।)

और नवोन्मेष पर आरोप मढ़ दिया अब इसमें कितनी सच्चाई है यह तो समय ही बताएगा ।

फाइनल रिपोर्ट से बात करते हुए नवोन्मेष के संस्थापक विजीत सिंह ने बताया कि नाटक का सार आप पढेंगे तो आपको सब कुछ हास्यास्पद लगेगा। कोई भी लेखक या नाटककार इतना बेवकूफ नहीं हो सकता कि वो भगवान को पिटते हुए दिखाए। मेरा पूरा प्रयत्न होता है कि हर एक क्षण रचनात्मक कार्य में लगाए रहूँ। इस नाटक के लिए लगभग एक हफ्ते रात भर सोया नहीं हूँ। जिलाधिकारी महोदय ने नाटक के बाद गले लगा लिया मंच पर आकर। बिना किसी तथ्य के इस तरह के आरोप जब लगते हैं तो दुःख से ज्यादा हँसी आती है। यह जो बाते फैलाई जा रही है बहुत ही हास्यास्पद हैं मै जल्द से जल्द इस प्रकरण पर FIR करूंगा।


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