April 19, 2018
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फाइनल रिपोर्ट स्पेशल
गोरखपुर: “आए थे हँसते खेलते मयख़ाने में ‘फ़िराक़’, जब पी चुके शराब तो संजीदा हो गए” और “आने वाली नस्लें तुम पर फ़ख़्र करेंगी हम-असरो, जब भी उन को ध्यान आएगा तुम ने ‘फ़िराक़’ को देखा है।” नज्म व गजल को एक नया आयाम देने वाले रघुपति सहाय (फिराक गोरखपुरी) के मुरीद केवल देश में […]Continue Reading
गोरखपुर
गोरखपुर: रफ्ता रफ्ता गैर अपनी ही नजर में हो गये वाह री गफ्लत तुझे अपना समझ बैठे थे हम शायर फिराक ने यह शेर शायद अपने ऊपर ही कहा होगा। इस शेर का मफहूम तो आप आखिरी में खुद बा खुद समझ जायेंगे। खैर पूण्यतिथि है तो इस अजीम शायर को खिराजे अकीदत पेश करने […]Continue Reading